बांदा मे आराधना और शर्मिला गैस एजेंसियों में जनता की लाइन....
आज 23 मार्च की यह खबर #बुंदेलखंड के जिला #बांदा से प्रकाशित है। पिछले एक सप्ताह से यही खबरें स्थानीय स्तर पर विभिन्न अखबारों में छप रहीं है...
शर्मिला गैस एजेंसी ने 10 मार्च को नया कनेक्शन आशीष कुमार दीक्षित के नाम से देकर 7000 रुपया दो एलपीजी गैस सिलेंडर के लिए लेकिन आज 23 मार्च तक किताब और रसीद में लिखी सामग्री उपलब्ध नहीं कराई है।
बांदा। आज 23 मार्च की यह खबर #बुंदेलखंड के जिला #बांदा से प्रकाशित है। पिछले एक सप्ताह से यही खबरें स्थानीय स्तर पर विभिन्न अखबारों में छप रहीं है। सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक/ टीवी मीडिया सरकार की चापलूसी में ग्राउंड पर इस मुद्दे का सच नहीं दिखा रहे है। बांदा मे आराधना इंडेन गैस और शर्मिला इंडेन गैस एजेंसी में रोज लंबी लाइन लग रहीं है। यहां तक शर्मिला और आराधना गैस एजेंसी में नए कनेक्शन बंद है। विगत 10 मार्च को शर्मिला गैस एजेंसी (स्वराज्य कालोनी,बांदा) से दो एलपीजी गैस सिलेंडर का नए कनेक्शन कराया गया लेकिन आज 23 मार्च तक उपभोक्ता को 7000 रुपया नकद लेने के बावजूद प्राप्त रसीद अनुसार सिलेंडर, पीआर पाइप, रेगुलेटर, गैस चूल्हा नहीं दिया गया है।
इस पोस्ट पर रसीद का फोटो है। बांदा का कोई भी सत्तारूढ़ विधायक, स्थानीय मंत्री अथवा बीजेपी पार्टी पदाधिकारी जनता की लाइन में खड़ा नहीं है। उन्हें उनके कोटे से मनचाही एलपीजी गैस सिलेंडर घर बैठे मिल जाती है। जिले का प्रशासन भी यही लाभ उठाता है। किन्तु आम नागरिक सुबह चार बजे से आराधना और शर्मिला गैस एजेंसी की लंबी कतार में पुलिसिया भय के दरम्यान रसोई ईंधन एलपीजी गैस सिलेंडर को मारामारी कर रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के आला नेताओं मुताबिक देश में गैस की दिक्कत नहीं है। ऐसा लगता है या तो कालाबाजारी दलालों से जनता को परेशान किया जा रहा है। या फिर सरकारी तंत्र एलपीजी गैस संकट को नजरंदाज करने का हुनर सीख लिया है। जिससे उनकी चुनावी लाज बची रहे।
वहीं आने वाले दिनों में आपको 14.2 किलोग्राम गैस वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर में महज 10 किलोग्राम गैस ही मिल सकती है। देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित होने और देश में एलपीजी भंडार तेजी से घटने के बीच यह कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। इकनॉमिक टाइम्स की खबर मुताबिक आने वाले दिनों में यह संकट और बढ़ सकता है।
खबर के मुताबिक, कंपनियों की इस प्लानिंग के तहत 14.2 किलो के सिलेंडर में सिर्फ 10 किलो गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है, ताकि सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।