बांदा के युवाओं ने बढ़ाया कदम, पर्यावरण बचाएंगे हम
बुंदेलखंड के जिला बांदा मे बीते रविवार को शहर के अवस्थी पार्क परिसर में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन...
"बुंदेलखंड के जिला बांदा मे बीते रविवार को शहर के अवस्थी पार्क परिसर में एक दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन बांदा के युवाओं ने किया था। इसका उद्देश्य हाल की गर्मी में बांदा का देशभर में बढ़ता तापमान और पर्यावरण पहलुओं पर खुला संवाद करना था। इस अभियान को छात्र नेता एवं विधि विद्यार्थी लव सिन्हा और शैलेन्द्र वर्मा ने संयुक्त रूप से शहर वासियों के साथ आयोजित किया था।"
बांदा/बुंदेलखंड। इस वर्ष गर्मी के मौसम में बांदा के देश और दुनिया में बढ़ते तापमान का रिकॉर्ड स्थानीय युवाओं के लिए भी चिंता का सबब बन गया है। युवा पीढ़ी भी सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर बांदा के ध्वस्त होते ईको सिस्टम और प्रशासन की लापरवाही पर तंज कस रही है। उधर इधर हाल के आंधी तूफान में बांदा का तापमान कुछ कम जरूर हुआ है लेकिन जिस तरह 48 डिग्री तक गर्मी ने बांदा वासियों को हलाकान किया है उस घटनाक्रम ने उनकी चेतना को कुरेदने का काम जरूर किया है। इसी कड़ी में बांदा के दो युवा छात्र नेताओं क्रमशः लव सिन्हा और शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने सोशल मीडिया पर अनायास एक एआई पोस्टर से आम जनमानस को जोड़ते हुए अपील करते हुए 31 मई दिन रविवार को एक साथ बैठने का आवाहन किया। उन्होंने अपने युवा साथियों के साथ शहर की नगरपालिका के समीप स्थित अवस्थी पार्क में रविवार को शाम 5 बजे "जल,जंगल,पहाड़ एवं नदी बचाओ अभियान" के तहत खुली चौपाल आयोजित की थी। जिसमें सभी आम नागरिक खुले मैदान में जमीन पर बैठे और इको फ्रेंडली कपड़े के बैनर का प्रयोग किया गया। यह अब प्लास्टिक और फ्लैक्स के दौर में कम देखने को मिलता है। युवाओं ने साधारण मंच की मेजबानी भी जनता को समर्पित कर दी और सभी को अतिथि दीर्घा में स्थान दिया। अर्थात आम और खास सभी एक साथ जमीन पर बैठकर बांदा की प्रदूषित आबोहवा, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारणों मंथन कर रहे थे। युवाओं ने बेबाकी से बांदा की सरहद पर दो दर्जन लाल मौरम खदानों के संचालन पर आगामी एक दशक के लिए रोक लगाने की मांग उठाई है। वहीं उन्होंने वनविभाग द्वारा अन्य विभागों के साथ मिलकर हर साल किए जा रहे कागजी पौधारोपण पर भी सवाल खड़े किए है। युवाओं ने नरैनी, गिरवा, महोबा आसपास ग्रेनाइट के पताल तोड़ भयावह खनन पर गहरी चिंता जाहिर की है। आयोजन की भूमिका की रचने वाले युवा लव सिन्हा ने जिला प्रशासन और नगरपालिका से आगामी जुलाई के माह में किए जाने वाले 54 लाख पौधारोपण की सतत निगरानी और समाज की सहभागिता भी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
मानव श्रृंखला,पोस्टर वार, हस्ताक्षर अभियान, जनसभा से बढ़ेगा कारवां
आयोजन में युवा पत्रकार अभिषेक शुक्ला ने कहा कि आगामी दिनों में इस अभियान को कई चरणों में आम जनता के बीच चलाया जाएगा। जैसे पोस्टकार्ड और हस्ताक्षर अभियान, मानव श्रृंखला, कोचिंग और स्कूलों में जनसभा की जाएगी। आवश्यकता पड़ी तो युवा मिलकर जनहित याचिका के माध्यम से भी बांदा के बिगड़ते पर्यावरण को संतुलित करने का काम करेंगे। छात्र शैलेंद्र कुमार वर्मा, खबर लहरिया की संपादक कविता बुंदेली, तिंदवारी विधानसभा के नेता जयराम सिंह बछेऊरा, छात्र नेता और अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार मिश्रा, दीन दयाल सोनी, समाजसेवी राकेश बाजपेई ने इसका समर्थन किया है।
समाजसेवी उमाशंकर पांडेय ने दिया समर्थन
युवाओं द्वारा इस सकारात्मक पहल को बांदा के सामाजिक कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय ने भी उपस्थित होकर समर्थन दिया। उन्होंने भावी पीढ़ी से इस जन मुहिम को धार देने की अपील करते हुए अपने व्यस्त समय से उपलब्ध यथासंभव सहयोग युवाओं को देने की बात कही है। वहीं जयराम सिंह बछेऊरा ने सार्वजनिक मंच पर स्वयं द्वारा खनन कार्य बंद करने का वचन दिया। साथ उन्होंने अपने करोबार अनुभव साझा करते हुए उनका लाभ इस अभियान हेतु युवाओं देने का वादा किया। वहीं उन्हें हर सहयोग देने की बात कही है। हमीरपुर से आए बुंदेलखंड राष्ट्र सेना के विनय तिवारी ने इस मुहिम को बुंदेलखंड के सभी जिलों तक पहुंचाने की बात कही और बांदा के युवाओं की इस आयोजन हेतु सराहना की है। बांदा के हर वार्ड से 5 युवा और आम नागरिक इस अभियान के लिए जोड़ने की बात कही गई जो सोशल मीडिया से प्रशासन तक पर्यावरण के मुद्दे मसलन अवैध खनन, वनविभाग की कार्यशैली पर निगरानी, जंगल कटान के आंकड़े और जानकारी, समाज द्वारा किए जा रहे पौधारोपण का संकलन एवं प्रसार, प्रचार करेंगे। पत्रकार मनोज धुरिया, दीपक पांडेय ने इसका समर्थन किया।
आशीष सागर ने दस्तावेज से दिखाई असलियत
बांदा के पर्यावरण पैरोकार / पत्रकार आशीष सागर दीक्षित ने पिछले 16 वर्षों का दस्तावेज सार्वजनिक मंच पर रखा। उन्होंने सूचना अधिकार से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर वनविभाग और खनिज विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया। दस्तावेज दिखाते हुए अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे मे ही चित्रकूट में 5 पौधे, 159 पेड़ काटे गए। बांदा में 16 पौधे, 625 पेड़ काटे गए। महोबा मे 3479 पौधे, 86 पेड़ काटे गए। हमीरपुर में 172 पौधे, 286 पेड़ काटे गए। जालौन में 232 पौधे, 97 पेड़ काटे गए। औरैया में 1,72,477 पौधे,8 पेड़ काटे गए गए। इटावा में 12665 पौधे काटे गए। इसके सापेक्ष कार्यदाई संस्था यूपीडा को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे मे क्रमशः बांदा मे 8 हेक्टेयर, चित्रकूट में 53 हेक्टेयर, महोबा मे 2.4868 हेक्टेयर, हमीरपुर मे 10.65 हेक्टेयर, जालौन में 4.04 हेक्टेयर, औरैया में 22.9393 हेक्टेयर, इटावा में 7.30 हेक्टेयर, आरओडब्ल्यू एवं मीडियन 840 हेक्टेयर अर्थात कुल 948.4161 हेक्टेयर ग्रीन बेल्ट विकसित करना था। किन्तु आज तक धरातल पर यह संभव नहीं हुआ है। वहीं जिले की 20 मौरम खदानों में एनजीटी और सरकार की मंशा के खिलाफ दिनरात भारी उत्खनन किया जाता है जिसने यहां का पारिस्थितिकी तंत्र और जैवविविधता को डैमेज कर दिया है।
अब तक किए गए पौधारोपण पर एक नजर
सरकारी आंकड़ों की मानें तो साल 2021 तक चित्रकूट मंडल में ही 3.90 करोड़ पौधारोपण किया गया। जबकि 81.5 लाख परिवार है। इस हिसाब से पेड़ो का आंकड़ा गत 2021 तक 2638 प्रति वर्ग किलोमीटर होता है। चित्रकूट मंडल में चार जिले है और प्रति वर्ग किलोमीटर 1270 जनसंख्या घनत्व 2011 की जनगणना का है। वहीं 47,71,363 जनसंख्या मंडल की है। यहां 8,51,493 परिवार है। नजीर देखिए कि साल 2020 और 2021 मे ही क्रमशः 1,80,8300 और 2,09,32,657 लाख पौधारोपण हुआ है। इस नजर से प्रति वर्ग किलोमीटर 317 आबादी के औसत पर 2638 पेड़ आते है। यह महज दो साल के पौधारोपण का आंकड़ा है। इससे उलट यूपी में साल 2024-2025 मे 36 करोड़ पौधारोपण किया गया है। जबकि साल 2023-2024 मे यह 30 करोड़ पौधारोपण था। वहीं साल 2022-2023 में 25 करोड़ पौधारोपण हुआ था। जबकि साल 2022-2021 20 करोड़ पौधारोपण प्रदेश में किया गया था। चित्रकूट मंडल में वर्ष साल 2019 से 2022 तक 10,037,478 पौधे रोपित होने का दावा है। इसके अतिरिक्त वनविभाग एनएफसीसी, जायका योजना से बुंदेलखंड में लाखों पौधारोपण कागजों में कर चुका है। यहां मंडल के तीन जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर मे ही एनएफसीसी योजना से 753 हेक्टेयर क्षेत्रफल में साल 2021 तक 7,09,075 पौधारोपण पर 11.23 करोड़ रुपए खर्च हो चुके है। वनविभाग के सरकारी आंकड़े बतलाते है कि साल 2021 में अकेले बांदा के अंदर 36.88 लाख पौधारोपण किया गया था।
यूपी बुंदेलखंड मे कुल भूभाग का औसत वन क्षेत्र
एक दिवसीय संवाद में सूचना अधिकार से अब तक प्राप्त वजानकारी मुताबिक साल 2022 तक यूपी बुंदेलखंड के सात जनपदों में क्रमशः बांदा 2.31 %, महोबा 5.14 %, जालौन 5.42 %, हमीरपुर 5.65 %, झांसी 6.05 %, ललितपुर 11. 54 % , चित्रकूट 19.64 % है। यह आंकड़े फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 की रिपोर्ट में भी उल्लिखित है। बुंदेलखंड में ललितपुर और चित्रकूट में आंशिक नैसर्गिक जंगल कुल भूभाग का शेष है। यहां पहाड़ और जंगल होने से कुछ राहत है लेकिन बावजूद इसके एक भी जिला राष्ट्रीय वन नीति 33 फीसदी जंगल के करीब तक वनविभाग की स्थापना से आज तक नहीं पहुंचा है। विडम्बना देखिए कि सपा सरकार से भाजपा तक 6 बार से ज्यादा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर भी सरकार 6 फीसदी जंगल और पौधरोपण को बचाने में नाकामयाब है।