बांदा : पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष सहित तीन अज्ञात पर भी केस दर्ज, यह क्रास मुकदमा देखिये क्या रंगत लाता है...
बांदा शहर में मौजूदा राजनीति कूटरचित मुकदमों के अंधेरे कुएं में झूल रही है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष व सपा नेता मोहन साहू की तरफ से दिए प्रार्थना पत्र...
"बांदा में बीते 2 जून को शहर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष एवं समाजवादी पार्टी के नेता मोहन साहू की तहरीर पर चप्पल मारने वाली दलित महिला गीता सहित प्रदीप त्रिपाठी उर्फ राजा पर मुकदमा अपराध संख्या 274/2026 लिखा गया है। वहीं राजनीतिक उठापठक के बीच इसी दिन का घटनाक्रम दिखाते हुए दलित महिला गीता की तरफ से भी सपा नेता मोहन साहू समेत 3 अज्ञात पर अपराध संख्या 277/2026 नगर कोतवाली में लिखा गया है। इसमें बीएनएनएस की धारा 75, 352, 351(3) और 3(2)5a एसएसी/एसटी में अभियोग दर्ज हुआ है।"
बांदा। बांदा शहर में मौजूदा राजनीति कूटरचित मुकदमों के अंधेरे कुएं में झूल रही है। पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष व सपा नेता मोहन साहू की तरफ से दिए प्रार्थना पत्र पर नगर कोतवाली पुलिस टीम ने पहले पत्रकार की भूमिका में साजिश कर्ता प्रदीप त्रिपाठी उर्फ राजा एवं दलित महिला गीता पर मुकदमा अपराध संख्या 274/2026 लिखा था। वहीं दिनांक 2 जून को ही दलित महिला गीता की तहरीर पर सपा नेता मोहन साहू समेत तीन अज्ञात पर भी अभियोग दर्ज किया गया है। यहां यह बतलाते चलें कि मोहन साहू की तरफ से एफआईआर में अंकित घटनाक्रम पर जो धाराएं उक्त दोनों आरोपियों पर लगाई गई है। ठीक उससे एक धारा अलग 75 और अनुसूचित जाति, जनजाति अधिनियम के तहत दलित महिला के द्वारा दिए प्रथम सूचना रिपोर्ट पर मोहन साहू समेत तीन अज्ञात पर केस दर्ज है। इसको सियासी लागलपेट कहिये या एकदूसरे पर क्रॉस मुकदमे की इबारत का फलसफा लेकिन इतना तो तय है कि बांदा की वर्तमान राजनीति बेहद गंदी (डर्टी) हो चुकी है। इस शहर / जिले में किसी पर भी खुन्नस निकालने को फर्जी मुकदमा लिखवाया जाना सामान्य घटना है। किन्तु यदि घटना वाजिब हो और आप ताकतवर या जुगाड़ वाले नहीं है तो एफआईआर दर्ज कराने में माथे पर बल पड़ जाएंगे।
यह भी पढ़े : सपा नेता मोहन साहू पर चप्पल मारने की साजिश रचने वाले "पत्रकार" और महिला पर मुकदमा....
दलित महिला ने छेड़छाड़ और गाली गलौच सहित अन्य घटना दिखाई
शहर की दलित महिला ने मोहन साहू और तीन अज्ञात पर दिनांक 2 जून को ही खुटला रोड राजघाट मुक्तिधाम मार्ग पर मोहन साहू समेत तीन अज्ञात के ऊपर जातिसूचक शब्दों की गालियों का प्रयोग करना, उसके साथ छेड़छाड़, अभद्रता और जान से मारने की धमकी आदि का मामला बनाया है। एफआईआर में महिला ने अपनी बेटी पे भी मोहन साहू द्वारा उत्पीड़न करने की धमकी देने की बात लिखी है। देखना होगा कि इन दोनों मुकदमों में सियासी माहौल जनता के संदर्भ में क्या असर छोड़ता है। लेकिन जनता को आगामी चुनाव विधानसभा 2027 की सुगबुगाहट के दरम्यान कचहरी स्तर तक पटखनी देने और मौका पड़े तो एकदूसरे के चरित्र हनन तक करने का संदेश देने की कवायद शुरू हो चुकी है। फिलहाल समाजवादी और भाजपा की ये राजनीतिक विडम्बना समाज के लिए स्वस्थ राजनीति और पारदर्शी व्यवस्था का शुभ संकेत नहीं है।