तंदूर बन गया बांदा, चौथे दिन भी 48 डिग्री पार

यूपी बुंदेलखंड का जिला बांदा लगातार चौथे रोज भी 48 डिग्री चल रहा है। हालात ये है कि सुबह 9 बजे के बाद आवश्यक काम हुए तो ही आम लोग घरों से सड़क पर निकल रहें है...

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May 21, 2026 - 12:32
May 21, 2026 - 13:02
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तंदूर बन गया बांदा, चौथे दिन भी 48 डिग्री पार
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आशीष सागर दीक्षित

बांदा। यूपी बुंदेलखंड का जिला बांदा लगातार चौथे रोज भी 48 डिग्री चल रहा है। हालात ये है कि सुबह 9 बजे के बाद आवश्यक काम हुए तो ही आम लोग घरों से सड़क पर निकल रहें है। पिछले कई साल का रिकॉर्ड तोड़ती मई की ये आग बरसाती गर्मी से जनता,घेरलू पशुओं और वन्यजीव तक की आफ़त आ गई है। बतलाते चले कि बीते 17 मई को बांदा 46 डिग्री, 18 मई को 47 डिग्री और  19 व 20 मई को 48 डिग्री पर पहुंचा है। तंदूर की तरह आग उगलती तारकोल की सड़को ने बांदा के अनियोजित विकास और इको सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।

बड़ी बात है कि पिछले दो दशकों से यहां ग्रेनाइट और लाल मौरम,बालू की खादानों का खनन, हर साल करोड़ों रुपए से लाखों फर्जी पौधरोपण ने जैवविविधता को बुरी तरह प्रभावित किया है। बांदा आसपास क्षेत्र की 25 फीसदी पहाड़ी पताल तोड़ खनन दफन हो चुकी है। वहीं केन, यमुना, रंज, मंदाकिनी, बाघिन नदियों में भारी अर्थ मूविंग प्रतिबंधित मशीनों, लिफ्टर से भयावह मौरम खनन ने बायलॉजिकल स्तर पर बांदा की आबोहवा को प्रभावित किया है।

वहीं प्राचीन तालाबों, कुओं और नैसर्गिक जलस्रोतों की बर्बादी ने पानीदार बुंदेलखंड के बांदा को बंजर करने का सुनियोजित खाका तैयार किया है। बसपा, सपा सरकार से फैला खनन माफिया आज तक बेपरवाह पठारी मिट्टी वाले बांदा के पर्यावरण को रौंद रहा है। जिसमें एनजीटी, सर्वोच्च न्यायालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम कानून बौने साबित हो रहें है।