एआई से रोते हुए फोटो बनाकर न्याय को ललकार रहा एनडीटीवी का दलाल, अभ्यस्त दुष्कर्मी राजा भैया का कमाल....
बुंदेलखंड के मंडल मुख्यालय बांदा के अतर्रा निवासी राजा भैया यादव जो विद्याधाम समिति का संचालक और चिंगारी का मुखिया है...
बांदा। बुंदेलखंड के मंडल मुख्यालय बांदा के अतर्रा निवासी राजा भैया यादव जो विद्याधाम समिति का संचालक और चिंगारी का मुखिया है। यह लगातार दलित महिला से दो बार दुष्कर्म, अपहरण आदि की धाराओं में जिला कारागार की हवा खाकर हाल ही में उच्च न्यायालय से जमानत लेकर बाहर आया है। मुकदमा अपराध संख्या 043/2025 और 0314/2024 थाना अतर्रा, बांदा में रहकर राजा भैया पांच, पांच माह जेल के अंदर रहा है।
पुलिस विवेचना में चार्जशीट विशेष न्यायालय एससी/एसटी कोर्ट में दाखिल हो चुकी है। राजाभैया इस वक्त मुकदमा अपराध संख्या 066/2026 थाना अतर्रा में अपने दो भतीजों क्रमशः ओम यादव और छोटा यादव के साथ एक पिछड़ी जाति की महिला के साथ गैंगरेप में फरारी काट रहा है।
इधर राजा भैया यादव ने बांदा के लाल माइक उर्फ एनडीटीवी के स्ट्रिंगर मनीष मिश्रा (मौरम खंड चार मरौली में दो सैकड़ा पत्रकारों की बोली लगाने वाले पतनशील तथाकथित पत्रकार) को अपने नक्शे कदम पर उतारकर सोशल मीडिया मे समाज और लोगों को बरगलाने में सक्रिय है। ठीक वैसे जैसे जून 2024 को जेल से छूटकर राजा भैया ने महात्मा की तर्ज पर अपनी जेल तपस्या का बखान फेसबुक में किया था। यहां बतलाते चलें कि प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड फाउंडर एवं पत्रकार/पर्यावरण पैरोकार आशीष सागर दीक्षित पर 14 मार्च 2016 को थाना नरैनी के ग्रामपंचायत करतल अंश बाबूपुर की अधेड़ एवं लगभग अस्सी वर्षीय धोबी जाति की दलित महिला को औजार बनाकर राजा भैया यादव ने मुकदमा अपराध संख्या 056/2016 थाना नरैनी में दर्ज कराया था। यह महिला आशीष सागर दीक्षित सहित 6 लोगों पर केस लिखवा चुकी है। जिसमें अन्य आरोपी 2922 मे बरी हुए है। वहीं पत्रकार के केस में तत्कालीन सीओ नरैनी/ आईओ ने पुलिस विवेचना में दो बार फाइनल रिपोर्ट, क्लोजर आख्या लगा चुकी है। वहीं इसमें उच्च न्यायालय से धारा 482 मे याचिका संख्या 6746/2019 के तहत प्रोसिडिंग स्थगन आदेश (स्टे) हुआ था। यह केस हाईकोर्ट में हाल ही मे जस्टिस बने पूर्व अधिवक्ता राजीव लोचन शुक्ला एवं सत्यव्रत त्रिपाठी जी पैरोकारी कर रहे थे। उक्त केस में स्थगन आदेश लगातार हाईकोर्ट में राजा भैया की तमाम छल कपटी चालबाजी के बावजूद चल रहा था। गौरतलब है बीते 20 अप्रैल को हाइकोर्ट में सिंगल बेंच जस्टिस डाक्टर गौतम चौधरी की पीठ पर यह स्थगन आदेश का केस सुनवाई को लिस्ट था। रोजमर्रा की तरह केस लिस्ट होने के एक दिन पूर्व आवेदक याचिका कर्ता के अधिवक्ता के मोबाइल पर मैसेज सूचना सुनवाई की आती है लेकिन यह नहीं दी गई। वहीं 20 अप्रैल को पूर्व अधिवक्ता एवं वर्तमान जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला के साल 2019 से इस केस में सहयोगी रहे अधिवक्ता सत्यव्रत त्रिपाठी अपने नाना जी की गत एक सप्ताह से चल रही बीमारी के कारण हाईकोर्ट में अनुपस्थित थे। क्योंकि संवाददाता के केस लिस्ट होने की कोई जानकारी उनके पास नहीं थी। सुनवाई के दिन आधे घंटे पूर्व विपक्षी राजा भैया यादव और इनकी मोहरा बनकर साजिश का काम रही बुजुर्ग दलित महिला के अधिवक्ता संतोष सिंह ने अधिवक्ता सत्यव्रत त्रिपाठी को मोबाइल पर जानकारी देकर केस सुनवाई होने की बात बतलाई। इतनी जल्दी बिना फाइल के हाईकोर्ट में उपस्थित होना मुनासिब नहीं था। अलबत्ता उन्होंने अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा (जस्टिस अश्वनी मिश्रा के बेटे एवं सुप्रीम कोर्ट के जज रहे जस्टिस रंगनाथ मिश्रा के नाती) ने अपने जूनियर को सुनवाई के लिए जस्टिस डाक्टर गौतम चौधरी की बेंच में उपस्थित होने के लिए भेज दिया। लेकिन माननीय जज ने उनकी बात नहीं सुनी क्योंकि उनका कोई वकालत नामा नहीं लगा था। जस्टिस डाक्टर गौतम चौधरी ने अधिवक्ता सत्यव्रत त्रिपाठी को अनुपस्थित मानकर स्थगन आदेश अर्थात आवेदन पत्र निरस्त करने का फैसला दिया। किन्तु उन्होंने मैरिट आधार पर पुनर्स्थापन सूची में रिकॉल एवं अंतिम बहस को गुंजाइश बरकरार रखी है। यह हाईकोर्ट की वेबसाइट के केस स्टेट्स में "नेचर ऑफ डिस्पोजल" पर अंकित भी है। बावजूद इसके राजा भैया यादव ने माननीय हाईकोर्ट और स्थानीय विचारण कोर्ट की मर्यादा को ताक पर रखकर सांठगांठ करके एनडीटीवी के स्ट्रिंगर और लाल मौरम माफियाओं से पत्रकारों की वसूली करने वाले मनीष मिश्रा, दैनिक जागरण के पूर्व चपरासी रहे कथित पत्रकार अजय उर्फ प्रवीण सहित अन्य लोगों से एक "एआई पोस्टर वार" जनरेट करके आशीष सागर दीक्षित को "मै हूं आशीष सागर बलात्कारी" लिखते हुए अनर्गल बयानबाजी बिना कानूनी समझ के तोपचंद्र बनकर की है।
काबिलेगौर बात है कि यही गैंग और राजा भैया के सरपरस्त पीत पत्रकार उसके जेल जाने से लेकर मानिकपुर ग्राम बगदरी की दलित महिला के द्वारा दो बार दुष्कर्म की एफआईआर पर गूंगे बनकर लाल माइक की वसूली खा रहे थे। इस कतार में इस गुट के अमूमन पत्रकार थे जो पुलिस प्रशासन के सामने राजा भैया यादव को "गरीबों का मसीहा" दर्शाकर पेशी कराते रहें है, रहते है।
राजा भैया यादव पर दस मुकदमे दर्ज और आज भी गैंगरेप में फरार....
जिला बांदा के राजा भैया यादव आज भी दो बार बलात्कार के मुकदमे में जेल से छूटने के बाद भी मुकदमा अपराध संख्या 066/2026 थाना अतर्रा में अपने दोनों भतीजों क्रमशः ओम यादव और छोटा यादव के साथ फरारी काट रहें है। विडम्बना है कि माननीय न्यायालय के आदेश पर यह मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन आज तक इसमें राजा भैया, ओम यादव, छोटा यादव इन तीन अभियुक्तों की पुलिस दबिश या गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। वहीं ग्राम भुजरियन पुरवा (यहीं राजा भैया का फार्म हाउस है जहां कांड होते है। शेष अतर्रा नरैनी रोड स्थित एनजीओ कार्यालय मे रासलीला होती रही है जिन पर एफआईआर पोल खोलती है।) रहवासी पिछड़ी जाति की महिला सामूहिक दुष्कर्म की वारदात पर थाना पुलिस से कोर्ट, कचहरी के चक्कर काट रही है। बीते बुधवार भी पीड़िता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाएं है।
मालूम रहे कि जेल से छूटने के बाद कुछ राजा भैया प्रेमी मुख्य आरोपी को लेकर पुलिस अधीक्षक जी से मिले थे। जैसा मौके पर खड़े एक टीवी चैनल के मित्र पत्रकार ने बताया है। यदि ऐसा न होता तो दस से ज्यादा मुकदमे का नामजद अभियुक्त भी हिस्ट्रीशीटर बन चुका होता। लेकिन समाज सेवा के चोले से तकरीबन 18 बेगुनाह लोगों और बलात्कार, हरिजन एक्ट, छेड़छाड़, लूट आदि के मुकदमे लिखवाने का माहिर आदमी राजा भैया सिर्फ सरकारी धन और विदेशी फंडिंग के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेकर "गरीबों का मसीहा" उन तबके के साथ बनता है जो इसके काले कारोबार के लाभार्थी या फर्जी मुकदमों के जालसाज है। हरिजन एक्ट में केस लिखवाकर आम नागरिक और पीड़िताओं के परिजनों को परेशान करने वाला राजा भैया भाजपा की सरकार मे समाजवाद के चारित्रिक गटर को प्रवाहित करने का कलयुगी सत्कर्म कर रहा है। वहीं इसके सारथी बनकर एनडीटीवी इंडिया के स्ट्रिंगर सहित कुछ मुख्य पत्रकार अपने जेब और शराब खर्च को इसका महिमा मंडन करते है। देखना होगा कि माननीय उच्च न्यायालय से स्थानीय कोर्ट तक तिलिस्मी जाल बिछाकर अपना आपराधिक इतिहास जमानत में छिपाते हुए राजा भैया यादव और कितने परिवार बर्बाद करता है!!! यूपी के मुख्यमंत्री इस योगी जी दुष्कर्म के इस "समाजवाद" से निजात कब दिलाते है।