बांदा : बीजेपी जिला कार्यकारणी समिति से जानबूझकर क्षत्रिय असंतोष का माहौल....

उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यकारणी समिति का गठन कुछ जिलों में किया गया है। इस कड़ी में बांदा भी शामिल है। हाल ही में जिलाध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत...

PTBPTB
Mar 23, 2026 - 11:44
Mar 23, 2026 - 11:49
 0
बांदा : बीजेपी जिला कार्यकारणी समिति से जानबूझकर क्षत्रिय असंतोष का माहौल....
AI Generated Images - Gemini AI

बांदा। उत्तरप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यकारणी समिति का गठन कुछ जिलों में किया गया है। इस कड़ी में बांदा भी शामिल है। हाल ही में जिलाध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत द्वारा हस्ताक्षरित नई जिला कार्यकारणी का पत्र सामने आया। जिससे सोशल मीडिया मे अलग अलग भ्रांतियां फैल रही है। तिंदवारी विधानसभा से बिजेपी के झंडे पर संभावित तैयारी कर रहे राहुल सिंह गुड्डू के समर्थक या यूं कहिए कि उनके साथ रहने वाले कारखास क्षत्रिय और ब्रह्मण मिलकर सोशल मीडिया मे यह माहौल बनाते दिख रहें है कि नई जिला कार्यकारणी समिति में क्षत्रिय को जगह नहीं दी गई है।

गौरतलब है कि राहुल सिंह गुड्डू के एक समर्थक राहुल तिवारी ने फेसबुक पोस्ट पर जो लिखा वो स्क्रीन शाट खबर के साथ चस्पा है। उन्होंने पार्टी में क्षत्रिय से खौफ होने की बात तक लिख डाली है। वहीं योगेंद्र सिंह योगी निवासी ग्राम महोखर ने लिखा कि बिजेपी अब ओबीसी अर्थात पिछड़ों की पार्टी बन चुकी है। यहां बतलाते चलें कि जिला उपाध्यक्ष रहे ग्राम महोखर निवासी धीरेंद्र सिंह ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और जिला उपाध्यक्ष रहे धर्मेंद्र त्रिपाठी को इस बार जिला समिति में जगह नहीं मिली है। इस खेमे से जुड़े और ग्राम महोखर के मूल निवासी राहुल सिंह गुड्डू (संभावित तिंदवारी विधानसभा उम्मीदवार) के चाहने वालों में जिला अध्यक्ष द्वारा जारी जिला समिति सूची को लेकर खासा असंतोष व्याप्त है। अन्य फेसबुक पोस्ट भी कमेंट की शक्ल मे सामने आ रहीं है। जिसमें तिंदवारी विधानसभा के मौजूदा माननीय निषाद समाज से राज्य जलशक्ति मंत्री को ठाकुरों से चुनावी भय होने की बातें लिखी जा रहीं है ।

जिला समिति जातिगत समीकरण

सोशल मीडिया मे अनर्गल टिप्पणी लिखने वाले संभावित उम्मीदवारों के प्रियजन जिला समिति सूची का जातिगत आंकलन नहीं कर रहें है। काबिलेगौर है कि जिला मंत्री के ही पद पर डाक्टर देवेंद्र सिंह भदौरिया का नाम है। यह क्षत्रिय ही है। वहीं जिला मंत्री ही में विष्णु सिंह (सरनेम सिंह लगा है।) व देशराज सिंह नाम अंकित है। वहीं सोशल मीडिया संयोजक रमन सिंह ये वो नाम है जिनमें जातिगत संकेत सिंह लगा है। अब भले ही इनमें कुछ क्षत्रिय न हो यह अलग बात है। उधर जिला समिति में पांच ब्राह्मण समुदाय से, चार वैश्य / गुप्ता समाज से और चार ओबीसी दिख रहें है। वहीं एक नाम सीधे एसएसी बिरादरी का संकेत कर रहा है। वैसे भी जब तक सिंह के साथ भदौरिया, गौतम, दिखित,परिहार,सेंगर आदि न लगा हो तो ठाकुर होने का सत्यापन करना मुश्किल होता है। बावजूद इसके जिला समिति में जातिगत संतुलन रखने की कवायद जिला अध्यक्ष कल्लू सिंह राजपूत (लोधी समाज) ने की है। उधर सदर विधायक लाबी से भी राजभवन उपाध्याय जी को जिला उपाध्यक्ष बनाया गया है। वैश्य समाज का चर्चित चेहरा अमित सेठ भोलू जी को भी जिला उपाध्यक्ष पद मिला है। यह पूर्व में सपा की राजनीति के सिपाही रहें है। व्यापार मंडल और अन्य संगठन जैसे मुक्तिधाम, रेडक्रास से जुड़कर सामाजिक कार्य करते रहते है। सवाल यह है कि यदि बीजेपी क्षत्रिय समाज की अनदेखी करती तो तत्कालीन जिला अध्यक्ष संजय सिंह रहे। वहीं इसी सप्ताह राज्यपाल द्वारा विशेष अधिकार प्रयोग करके मनोनीत नगर पालिका सदस्यों मे देवेंद्र सिंह निवासी इंद्रा नगर का नाम भी शामिल है। यह दोनों क्षत्रिय ही है। राजनीति जातिगत संतुलन से चुनावी युद्ध में हर तबके का वोट बैंक रखना चाहती है। इसलिए चाहे बीजेपी हो या सपा, कांग्रेस या मौजूदा बसपा बिना ब्राह्मण और क्षत्रिय के उठ नहीं पाएंगी। यह जरूर है कि भारतीय जनता पार्टी ने बीते 9 वर्षों की यूपी सत्ता और 11 वर्षों की केंद्रीय सत्ता में ब्राह्मण का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। कुछ कानून, विधेयक सीधे से सवर्णों विरुद्ध है। वहीं यूपी सरकार मे सबसे अधिक तवज्जो क्षत्रिय और ओबीसी की है।