नमो नीर से दर्जनों नामों तक बिना लाइंसेंस आरो प्लांट करते भूजल दोहन...

अंतर्मुखी जलसंकट एवं भूगर्भीय जलस्रोतों की किल्लत से जूझता चटियल बुंदेलखंड इस मामले में सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाता है...

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Apr 3, 2026 - 11:32
Apr 3, 2026 - 11:36
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नमो नीर से दर्जनों नामों तक बिना लाइंसेंस आरो प्लांट करते भूजल दोहन...

"बांदा समेत चित्रकूट मंडल में भूगर्भ जल विभाग और उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी तक धृतराष्ट्र बनकर बैठे है। मंडल के चारों जिलों में तकरीबन हजार के आसपास भूजल दोहन करने वाले आरो प्लांट बिना लाइसेंस चल रहें है। भूजल का व्यावसायिक प्रयोग अथवा विक्रय करने का अधिकार किसी को नहीं है। जब तक कि वह व्यापारी भूगर्भ जल विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी प्राप्त नहीं कर लेता है। बांदा मे एक इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल तक ठेठ हिन्दी पट्टी पर बिना लाइसेंस के आरो प्लांट जिला परिषद इलाके में लगाकर खुलेआम पानी बेच रहा है।" 

बांदा। यूपी बुंदेलखंड के सातों जिलों या यूं कहिए यूपी,एमपी बुंदेलखंड में बेख़ौफ़ आरो प्लांट बिना लाइसेंस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बगैर एनआईसी पानी कारोबार से जुड़े हैं। अंतर्मुखी जलसंकट एवं भूगर्भीय जलस्रोतों की किल्लत से जूझता चटियल बुंदेलखंड इस मामले में सरकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाता है। उधर जिम्मेदार अधिकारी कहते है शिकायत मिलने पर कार्यवाही की जाएगी। भूगर्भीय जल,पानी का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है। अंदरखाने की खबर यह भी है कि बांदा के भूगर्भ जल विभाग के अवर अभियंता ने कुछ माह पहले करीब 300 लोगों को नोटिस जारी किया था। उन्हें आरो प्लांट से सम्बंधित लाइसेंस बनवाने सहित वर्षा जल संग्रहण और वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था पूरी करने को कहा गया था। अलबत्ता अभी तक इनमें से कितनों ने यह किया इसकी कोई मीडिया ब्रीफिंग भूगर्भ विभाग द्वारा प्रेस वालों के पास नहीं है। 

शहरी वाहन धुलाई सेंटर से मैरिज हाउस, निजी घरों तक भूजल का दोहन...

बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर,महोबा और झांसी मंडल के झांसी, ललितपुर, जालौन सहित मध्यप्रदेश वाले बुंदेलखंड के क्रमशः छह जिलों मसलन छतरपुर,पन्ना तक धड़ल्ले से बिना लाइसेंस के वाहन धुलाई सेंटर, मैरिज हाल,होटल में आरो प्लांट चल रहें है। यहां तक कि आवासीय आबादी वाले मुहल्ले भी इन आरो प्लांट का बाजार बन चुके है। बांदा के सर्वोदय नगर, इंद्रा नगर, जरैली कोठी,कटरा, क्योटरा, जिला परिषद क्षेत्र, अतर्रा, नरैनी मार्ग और अतर्रा कस्बे तक में यह आरो प्लांट मोहल्लों में खुल चुके है। घरों के स्वामी 6 इंची समर सेबिल पंप की बोरिंग कराकर बिना लाइसेंस आरो प्लांट लगा लेते है। उधर भूगर्भ जल विभाग और यूपीपीसीबी यानि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंख मूंदकर इन्हें चलने देता है। आंकड़ों की मानें तो बांदा में 200 से ज्यादा आरो प्लांट बिना लाइसेंस चल रहें है। जबकि चित्रकूट में 150, महोबा मे 150, हमीरपुर मे 125 आरो प्लांट बिना लाइसेंस चलते है। वहीं इन्हीं शहरों और कस्बों में भूगर्भ जल विभाग एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति बगैर वाहन धुलाई सेंटर भी चल रहें है। इनकी रोजाना की आमदनी हजारों रुपए है लेकिन लाइसेंस का एक सरकारी कागज और यूपीपीसीबी की एनओसी लेना इनको मुश्किल काम लगता है। या ये मानकर चले कि यह कारोबारी मुफ्त में भूगर्भ जल विभाग को प्रति माह 8 करोड़ से ऊपर राजस्व का नुकसान करते है।

धरती के जल की बर्बादी

भूगर्भ जल विभाग और उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लापरवाही से आवासीय घरों में यह अवैध आरो प्लांट, वाहन धुलाई सेंटर, मैरिज हाल में आरो प्लांट का संचालन होने से हर माह 6 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी सिर्फ बांदा शहर में निकलता है। जिसमें से पानी को फिल्टर करने की प्रक्रिया मे ईजाद की गई आधुनिक मशीनों से बड़ी मात्रा में सैकड़ों लीटर पानी अपशिष्ट तत्वों के साथ  बर्बाद किया जाता है। यह मुहल्ले की नालियों में बहता है। जबकि आरो प्लांट को वाटर रिचार्ज करने की तकनीक व्यावसायिक प्रतिष्ठान में क्रियान्वित करने के सख्त निर्देश जिलाधिकारी बांदा दे चुकी है। पूर्व में डीएम रही श्रीमती दुर्गा शक्ति नागपाल ने भूगर्भ जल विभाग और यूपीपीसीबी के मंडलीय क्षेत्रीय अधिकारी को शामिल करते हुए एक अनुश्रवण समिति बनाई थी। लेकिन सबकुछ कागजों में सिमट जाता है। भूगर्भ जल विभाग कहता की आरो प्लांट में लाइसेंस होने की स्थिति में विभाग इन प्रतिष्ठान में डिवाइस लगवाएगा। यह डिवाइस भूजल दोहन की निगरानी करके रीडिंग दर्ज करेगी। इसके बाद उक्त संचालकों से 1.20 रुपया प्रति लीटर के हिसाब से भूजल कर देय होगा। जिससे भूगर्भ जल विभाग को हर महीने 7.20 करोड़ रुपए राजस्व आमदनी होगी। गौरतलब है कि सभी सरकारी विभागों, गैर सरकारी भवनों, पानी सम्बन्धित व्यवसायिक प्रतिष्ठान में रुफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संग्रहण) सिस्टम की उपयोगिता अनिवार्य की गई है। बावजूद इसके गैर सरकारी तो छोड़िए सरकारी संस्थान ही इसमें असफल साबित हो रहें है। विकास भवन बांदा मे तत्कालीन डीएम हीरालाल जी द्वारा वर्षा जल संग्रहण को खुदवाए गए गड्ढों और टंकियों में सुखाड़ पड़ा है। सब रिपोर्ट कागजों में चाक चौबंद है। जिले में गली,गली चलते आरो प्लांट को अवैध रूप से संचालन हेतु रोकने की ठोस नीति और कार्यशैली फिलहाल आईसीयू में है। बुंदेलखंड में इस भूगर्भीय जल दोहन पर रोकथाम को किसी ने माकूल पहल नहीं की है। जिससे पानी माफिया और टैंकरों से सलाई करने वाले पानी विक्रेता बिना रोक टोक के व्यापार कर रहें है।

आरो प्लांट और पानी सप्लाई टैंकरों के रेट

बांदा आसपास के जिलों में आरो प्लांट वाले बैटरी ई रिक्शा, मैजिक गाड़ियों से रोज सुबह आवासीय घरों में प्रति पानी डिब्बा 20 से 30 रुपए उपभोक्ता से लेते है। वहीं पानी के टैंकरों से व्यापार करने वाले प्रति टैंकर 600 से 700 रुपए तक वसूली कर रहें है। इसके लिए उन्हें कोई सरकारी जल कर नहीं देना पड़ता है। ये तस्वीर आज बुंदेलखंड में "भूजल पानी माफिया" की शक्ल मे तब्दील हो रही है। जिससे आसपास के इलाकों का वाटर लेबल अर्थात जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। आज बांदा शहर में 150 की बोरिंग पर भी बमुश्किल पेयजल मिलते है। ज्यादातर जगह पत्थर आ जाते है। वहीं हैवी बोरिंग एवं पत्थर तोड़ने वाली ड्रिलिंग आधुनिक मशीनों से आरो प्लांट वाले डीप बोरिंग करा लेते है। जिस विकास भवन इलाके में तीस साल पहले महज़ 40 फुट पानी था। आज वहीं 200 फिट बोरिंग हो रही है। यही स्थिति वनविभाग, इंद्रा नगर,शहर के अन्यत्र मुहल्ले में है। तेजी से गिरता जल स्तर शहरी क्षेत्रों को भविष्य में बड़े संकट की तरफ धकेलने का काम करेगा। आरो प्लांट भी बीजेपी की मोदी सरकार में "नमो नीर" बिना लाइसेंस बेच रहें है। शायद यह राष्ट्रभक्ति का जीवंत फरेबी उदाहरण है। वे जानते है इस नमो नाम को पंच लाइन बना लेने अथवा बिल्ला लगा लेने के बाद स्थानीय प्रशासन उन्हें भगवा व्यापारी समझकर माफ कर देगा। वहीं अन्य आकर्षक नाम भी इन आरो प्लांट की शोभा बनकर धरती को बंजर करने का सुनियोजित कारोबार कर रहें है।