जितेंद्र सिंह के दलाल, नटवर केशव का कमाल

सदर तहसील के ग्राम दुरेड़ी अंतर्गत संचालित मौरम खंड मे केन नदी का चीरहरण राजनीति का सिंघम कर रहा है। इस मौरम खंड को संचालित करने वाले जितेंद्र सिंह के शागिर्द नटवर केशव...

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Mar 31, 2026 - 10:23
Mar 31, 2026 - 10:25
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जितेंद्र सिंह के दलाल, नटवर केशव का कमाल
  • बबेरू के मरका आसपास अवैध खनन महामारी के बाद सदर तहसील की दुरेड़ी में केन नदी की छाती पर पट्टेधारक की गदर।
  • सफेदपोश पूर्व तिंदवारी विधायक का खासमखास है जितेंद्र सिंह। इन्हीं का पिट्ठू है नटवर केशव...!
  • हर माह कलमकारों की सेज पर बिछाते कागजी रूपयों का बिस्तर, मौन रहती मीडिया काला कारोबार देखकर।
  • कांग्रेस छोड़कर बन चुके है राष्ट्रवादी, बांदा की जनता को दे रहें है नदियों से आजादी। 

बांदा। सदर तहसील के ग्राम दुरेड़ी अंतर्गत संचालित मौरम खंड मे केन नदी का चीरहरण राजनीति का सिंघम कर रहा है। इस मौरम खंड को संचालित करने वाले जितेंद्र सिंह के शागिर्द नटवर केशव को मीडिया मैनेजमेंट की बागडोर दी गई है। यहां काबिलेगौर है कि कभी जिले के कद्दावर मौरम खनन कारोबारी की मुनीमी करते हुए एक खदान की बेइमानी करके खुद रसूखदार बन जाने वाले पूर्व विधायक ने बांदा से लखनऊ तक चल, अचल संपति के कीर्तिमान स्थापित किए। वहीं ट्रांसपोर्ट और लाल मौरम के कारोबार से जुड़कर आज करोड़ों की प्रापर्टी के सरताज बन चुके है। इन्हीं के रिश्तेदार है जितेंद्र सिंह जिन्हें बांदा के बबेरू क्षेत्र की मौरम खदान खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता की छत्रछाया में चलाने का जिम्मा मिला है। इन खदानों में अवैध खनन भी ऐसा कि नदी की अस्मत को रौंदकर पट्टेधारक खनिज अधिकारी राज रंजन को खुश करने में लगे रहते है। वहीं जिले की मीडिया को साधने के लिए विकासखंड बबेरू से सदर तहसील के ग्राम दुरेड़ी तक नटवर केशव को किलेबंदी दी जाती है। ताकि मीडिया मौरम ठेकेदार के हरम में कलम की घुंघरूं पहनकर थिरकती रहे। जिससे पत्रकारिता की स्याही रहमदिली का इत्र बनकर उक्त मौरम पट्टेधारक को "रातदिन फलने,फूलने की दुआएं देने मे गुरेज न करें। 

दुरेड़ी खदान मे केन नदी पर एनजीटी की साख पर बट्टा

बांदा जिले में अवैध खनन के लिए विख्यात उक्त पट्टेधारक की नई नवेली मौरम खदान दुरेड़ी में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशानिर्देश और यूपी उप खनिज परिहार नियमावली की शर्तों की अनदेखी करते हुए लीज एग्रीमेंट को ताक पर रखकर सीधे केन की जलधारा में प्रतिबंधित अर्थ मूविंग पोकलैंड मशीनों को उतारकर खनन किया जा रहा है। मजेदार है कि दो आंखों वाले  खान अधिकारी राज रंजन और खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता ने नदियों में मौरम खनन की सारी मर्यादा और हाईकोर्ट से लेकर एनजीटी एवं सरकारी आदेशों को अपने कार्यालय के बख्तरबंद मे बंद कर दिया है। यहां तक कि एनजीटी मे क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मंडलीय अधिकारी झूठी जांच आख्या लगाते है। उन्हें ऐसा लगता है न्यायधीश तो दिल्ली बैठें है। जैसा दिखाया जाएगा उनको वही दिखेगा। लेकिन क्या अनैतिकता का रुपया कमाकर यह खनिज विभाग से जुड़े अफसर अपने बच्चों को ईमानदारी और पुरुषार्थ की कमाई करके आजीविका चलाने का रास्ता दिखाते होंगे ? मौरम ठेकेदार तो अधिकारियों से सांठगांठ करके राजस्व को चूना लगा ही रहा है। किन्तु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक छवि को बट्टा लगाकर उनकी ही पार्टी से जुड़े कद्दावर मौरम कारोबारी उर्फ नेता जी उर्फ पूर्व विधायक जी जनता में माननीय बन जाने का पुनः ख्वाब क्यों देखते है ? जब उन्हें इसी तर्ज पर आम नागरिक के प्राकृतिक संसाधनों को समूल खत्म करते जाना है। देखना होगा कि दुरेड़ी और बबेरू क्षेत्र के इस मौरम कारोबारी पर आयकर,ईडी और एनजीटी की आंच कब तक आती है। क्योंकि यह जो हो रहा है बांदा वासियों के भविष्य को गर्त में मिलाने का सिलसिला है। 

द पीटीबी
आशीष सागर दीक्षित