अशोक लाट अनशन स्थल खत्म तो विकास की घेराबंदी में बैठा होमगार्ड....
कचहरी तिराहे अशोक लाट पर अब अनशन,आमरण अनशन,सत्याग्रह और आंदोलन का प्रतीक चबूतरा स्थान विकास की भेंट चढ़ चुका है...
"करीब छह दशक पुराने अशोक लाट तिराहे को अब विकास की नजर लग चुकी है। बांदा के बाशिंदों को यहीं शासन, प्रशासन से अपनी मांग रखने और मनवाने को अनशन, सत्याग्रह और आंदोलन करने पड़े थे।"
बांदा। कचहरी तिराहे अशोक लाट पर अब अनशन,आमरण अनशन,सत्याग्रह और आंदोलन का प्रतीक चबूतरा स्थान विकास की भेंट चढ़ चुका है। मौजूदा सत्ता और प्रशासन चाहता भी यही था। कि लोकतांत्रिक आवाजों को नक्कारखाने मे गूंजने से रोक दिया जाए। अस्तु सदर विधायक जी की अनुशंसा पर विकास बजट आया तो कचहरी मार्ग से क्योटरा सड़क मार्ग का चौड़ीकरण हुआ है। इस विकास की दौड़ ने अशोक लाट तिराहे का अनशन और धरना स्थल खत्म कर दिया है। समाज और जनप्रतिनिधि, विधायक और सांसद को रत्तीभर फर्क नहीं पड़ना है। उनके लिए यह अच्छा ही कम से कम अब व्यवस्था से पीड़ित लोग उनके और सरकार या प्रशासन के खिलाफ अनशन, धरना, आंदोलन तो नहीं करेंगे।
खैरमकदम हौसलों की इस आपाधापी में एक होमगार्ड ने अशोक लाट तिराहे पर "विकास की घेराबंदी" मे हाथों में मांगपत्र लेकर धरना दिया है। काबिलेगौर है कि बांदा के अशोक लाट, कचेहरी तिराहे पर स्थित वर्तमान अशोक लाट को विकास की जद मे जानकार समस्या से पीड़ित एक होमगार्ड तेज धूप मे अपने अधिकारों की मांग कर रहे है । उक्त अनशनकारी को देखते ही जनता दल यूनाइटेड की नेत्री शालनी सिंह पटेल अपनी गाड़ी से उतर कर पीड़ित की समस्या सुनी। वहीं इसी दरम्यान पीड़ित होमगार्ड ने विभागीय अधिकारियों / कर्मचारियों की लापरवाही से शालनी पटेल को अवगत कराया। शालनी का होमगार्ड को इस तरह बैठे देखकर गुस्सा फूट गया। उन्होंने अनशनकारी को न्याय दिलाए जाने की कोशिश करने का वादा किया। वहीं पीड़ित होमगार्ड जवान राम सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि मै होम गार्ड का जवान हूं। मेरी ड्यूटी खनिज विभाग बांदा में लगाई गई थी जिसका मेरे द्वारा पूरी निष्ठा से पालन किया जा रहा है। किन्तु बीते 23 फरवरी 2026 को कम्पनी कमांडेंट के द्वारा 08.55 रात्रि को ओचक निरीक्षण किया गया। जिसमे होमगार्ड ननकाई, होमगार्ड भवानीदीन एवं होमगार्ड गंगा साहू उपस्थित मिले थे। वहीं शेष छह जवान खनिज अधिकारी के आदेशानुसार कार्य करते है। इससे नाराज होकर हमें नौकरी से हटाया जा रहा है जो गलत हैं। इसपर जेडीयू नेत्री शालनी सिंह पटेल का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि बांदा जिला प्रशासन पहले से ही बांदा अशोक लाट तिराहे एवं अनशन स्थल को हटाने का खाका खींच लिया था। उन्होंने कहा कि देश की विभूति 1947 में गोविंद बल्लभ पंत के कर कमलों से अशोक लाट का उद्घाटन किया गया था। बाद में गत 57 साल पहले तत्कालीन एसपी आगा मुईनुद्दीन शाह ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के 111 आंदोलनकारीयों पर गोली चलवाई थी। क्रांति और बदलाव का पर्याय यह स्थान आम जनता और पीड़ितों का अनशन स्थल रहा है। यहीं से लोगों को न्याय मिला। किन्तु विकास ने अब वर्षों पुराने अनशन स्थल को पूरी तरह जनता के लिए खत्म कर दिया है। जिला प्रशासन द्वारा सोची समझी साजिश के तहत खत्म किए जाने से अनशन कारी तेज धूम में बैठने को मजबूर है। यह समाज और सत्ता के साथ माननीयों को कटघरे में खड़ा करता है।