सांडी मौरम खंड एक का रुपया बंट गया तो किसी पत्रकार ने किसानों की खबर नहीं लिखी....
जिले की पैलानी तहसील के ग्राम सांडी खादर मे एक दर्जन किसानों ने बीते सोमवार को जिलाधिकारी की चौखट पर दस्तक देकर अपने निजी भूमि पर अवैध खनन का मुद्दा उठाया है...
आशीष सागर दीक्षित
"जहां रुपया बंट गया तो नहीं लिखते खबर, पंचम प्रजापति इस बात से बेखबर। यहां मंडल आयुक्त के आदेश पर भी नहीं होती कार्यवाही, खनिज अधिकारी लेते झूठी वाहवाही। सांडी खंड एक की महिमा निराली है, पूर्वांचल के बाहुबली की दिवाली है। इस खंड मे रजिस्ट्री दूसरे की खदान चला रहा कोई और, बांदा मे बेख़ौफ़ चलता अवैध खनन का दौर।"
बांदा। जिले की पैलानी तहसील के ग्राम सांडी खादर मे एक दर्जन किसानों ने बीते सोमवार को जिलाधिकारी की चौखट पर दस्तक देकर अपने निजी भूमि पर अवैध खनन का मुद्दा उठाया है। मजेदार है कि मौके पर जो किसान पत्रकारिता के अभिमन्यु बनकर अवैध खनन के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए किसानों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। उनसे सवाल पूछे जा रहे थे, आज मंगलवार तक किसी एक पत्रकार ने उन किसानों की अदनी सी खबर अखबार या चैनल पर लिखने का कार्य नहीं किया है। एक स्थानीय राज्य मान्यता प्राप्त पत्रकार ने बताया कि गत सप्ताह बाईपास के समीप किसी रोहित सिंह और यश यादव की मौजूदगी में जिले के सैकड़ा पत्रकारों को खदान संचालक के गुर्गों ने मासिक धर्म निभाते हुए रुपया बांट दिया था। तब खबर लिखने का दुस्साहस भला कौन करेगा ? अलबत्ता जिस खदान से रेवड़ी नहीं मिलती है उसमें अवैध खनन का वीडियो और खबर सोशल मीडिया पर चलने लगती है। मान्यता प्राप्त पत्रकार ने भी खबर नहीं लिखी लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इतनी दुर्दिनता पत्रकारों की मानसिकता में शायद इसलिए भी भर गई है कि जब पूरा सिस्टम माफिया के हाथ गिरवी रखा है और खनिज अधिकारी धृतराष्ट्र बनकर काम करते है तब एक पत्रकार के खबर लिखने से बुराई के अतिरिक्त उसको कुछ भी मिलना है। यही कारण है कि "हमाम में सब नंगे है" वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। कुछ लखनऊआ टीवी चैनल तो बाकायदा स्थानीय स्ट्रिंगर को टारगेट देकर पहले खबर चलवाकर प्रशासन पर कार्यवाही का दबाव बनाते है फिर झंडे के नीचे आने पर उनका "भारत स्वाभिमान" बौना हो जाता है।
सांडी के दर्जन भर किसानों ने डीएम से की शिकायत
सोमवार 4 मई को जिलाधिकारी अमित आसेरी की चौखट पर पहुंचकर दर्जन भर ग्रामीण किसानों ने गांव के पंचम प्रजापति के नेतृत्व में मांगपत्र दिया। इन किसानों में शामिल बरदानी, अर्जुन, गया प्रसाद, अच्छेलाल, लल्लू प्रसाद और हीरालाल आदि ने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर डीएम को ज्ञापन देकर निजी भूमि मे अवैध खनन रोकने की मांग उठाई है। बतलाते चले कि विगत 17 अप्रैल को मंडल आयुक्त श्री अजीत कुमार को भी कुछ किसानों ने गांव की किसान समाजिक कार्यकर्ता ऊषा निषाद के साथ भेंट करके तीन पेज का शिकायत पत्र और जीपीएस फोटो सहित जांच का मामला उठाया था। इस शिकायत पत्र में जिले की पांच मौरम खदान क्रमशः सांडी मौरम खंड एक (मेसर्स आरएस माइनिंग), बांदा की मौजा दुरेड़ी मौरम खंड (संचालक राजकुमार गुप्ता पुत्र एसके गुप्ता, कूंचा परमेश्वरी दास, मिस्टर गंज, तहसील सदर, रामपुर), थाना मटौंध अंतर्गत ग्राम मरौली की मौरम खदान खण्ड 5,4,6 को आरोपित किया गया था। इस क्रम में मंडल आयुक्त द्वारा 20 अप्रैल 2026 को पत्र जारी करके तत्कालीन डीएम बांदा को सात दिन के अंदर जांच आख्या प्रस्तुत करने के आदेश हुए थे। किन्तु डीएम साहेब श्रीमती जे रिभा का ट्रांसफर क्या हुआ खनिज अधिकारी राज रंजन और खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता की मौज हो गई। मंडल आयुक्त का पत्र कूड़ेदान की शोभा बन गया और बेधड़क जिले में इन खदानों सहित गिरवा के बहादुर स्योढा में तो लिफ्टर डालकर मध्यप्रदेश और यूपी बार्डर का बेजा लाभ उठाकर अवैध खनन होता है। वहीं कार्यवाही के नाम पर महज रस्म अदायगी होती रहती है। सूत्र बतलाते हैं कि लखनऊ के खनिज निदेशालय तक इसकी सेटिंग है। कुछ पत्रकार तो वहीं से जैक लगाकर खदान में मीडिया मैनेजमेंट का काम हथिया लेते है।
सांडी खादर खंड एक की रजिस्ट्री दूसरे के नाम और चलाता कोई और है
पैलानी तहसील के ग्राम सांडी खादर में मौरम खंड एक की रजिस्ट्री सदर रजिस्ट्रार के दफ्तर में सिल्वर लाइन ऑटो मोबाइल्स, स्टेशन रोड, एमजी रोड सतना के नाम है। वहीं आज इसको चला मेसर्स आरएस माइनिंग है। क्या बिना लिखापढ़ी रजिस्ट्री बेची जा सकती है? या मौखिक बेच दी गई है? अथवा रजिस्ट्री करवाने वाले ने खदान न चलाने की सूरत में पूर्वांचल के बाहुबली को साधकर मेसर्स आरएस माइनिंग के जरिए रातदिन खंड से बाहर जाकर अवैध खनन करने का ठेका लिया है? शिकायत कर्ता और किसानों को खदान वाले सीधा धमकी देते है यह सरकार की खदान है!!! कुछ नहीं होगा जो करना है कर लो !! वैसे भी जब खनिज अधिकारी राज रंजन जैसा अवैध खनन के पोषण का कर्मठ जिम्मेदार अधिकारी जिले में हो तब खान निरीक्षण कर्ता गौरव गुप्ता की बल्ले, बल्ले कैसे नहीं होगी ?
गौरतलब है कल सोमवार को कुछ पत्रकार बबेरू के चरका मौरम खंड 10 की खबर लिखें है लेकिन डीएम की देहरी पर पहुंचे किसान उन्हें नहीं दिखे क्योंकि दाम करे सब काम वाली रणनीति ने बांदा को लाल मौरम के अवैध खनन का कुख्यात गढ़ बना रखा है। उधर विपक्ष के राजनीतिक दल इस मामले में चुप रहते है क्योंकि कहीं न कहीं उनके नेता भी पूर्व में अमलोर और कनवारा खदान चलाते रहे है। वहीं तहबाजारी के शामिल खाता धंधे में हर पार्टी के नेता का रुपया पांडेय समूह में निवेश है। हाथ के पंजे से सपा की साइकिल तक बांदा में अवैध खनन का कमल चौतरफा खिल रहा है। जनता को सब्जबाग है कि अच्छे दिन आएंगे, किसान पानीदार बन जाएंगे।