विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को ही 8,58000 पौधारोपण का दावा...!!
पौधारोपण के लिए जुलाई से सितंबर खासकर सावन के माह में यह सबसे अच्छा उपयुक्त मौसम होता हैं जब नया पौधरोपण फलीभूत होकर...
"सूचना विभाग से जारी सरकारी विज्ञप्ति मुताबिक आज 5 जून को ही एक दिन में 8,58000 पौधारोपण हो गया है। जिसमें वन एवं वन्यजीव विभाग ने 64000 पौधे, ग्राम्य विकास विभाग ने 5,32000 पौधे, पंचायती राज विभाग ने 35000 पौधे, कृषि विभाग ने 1,33000 पौधे, उद्यान विभाग ने 88000 पौधे, नगर विकास विभाग ने 6000 पौधे, अन्य विभागों द्वारा व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया गया। किन्तु आंकड़ों और फोटोशूट के कुछ चित्रों के दरम्यान कहीं भी सरकारी अमले ने स्थानों का खुलासा नहीं किया है। सिर्फ नवाब टैक सर्किट हाउस, राजकीय मेडिकल कालेज और पुलिस लाइन परिसर की फोटो सूचना विभाग से सर्कुलेट की जा रही है। सरकारी विभागों और माननीयों के तामझाम से काश यह हर साल का पौधारोपण संरक्षित हो पाता तो बांदा में आंकड़ों के मुताबिक हर घर में जंगल होता।"
बड़ा सवाल यह है कि आज 5 जून को हरियाली सहेजने और जुलाई से सितंबर तक सघन पौधारोपण की रणनीति,एवं जनता से खुला संवाद करने की बनिस्बत इतनी तेज गर्मी में यह जो 8,58000 संख्या वाला पौधारोपण किया गया , क्या यह सर्वाइव होगा ? इस पौधारोपण का विभागों द्वारा स्थान जारी खबर मे क्यों नहीं खोला जाता है ? जनता भी तो देख सके कि ये भारीभरकम पौधारोपण कहां हो जाता है !!!
सवाल ये भी कि इस जून की तेज गर्मी में नए पौधे सर्वाइव कैसे कर सकते है , धरती का तापमान उनके अनुकूल नहीं होता है। यह पौधारोपण जनता करे या जिला प्रशासन / पुलिस लाइन परिसर में जमघट करते अधिकारी ।
पौधारोपण के लिए जुलाई से सितंबर खासकर सावन के माह में यह सबसे अच्छा उपयुक्त मौसम होता हैं जब नया पौधरोपण फलीभूत होकर पेड़ बनता है। तापमान का स्तर भी पौधारोपण के अंकुरण और परवरिश में बड़ा सहयोगी होता है। पर्यावरण बचाने को पर्यावास भी सही होना चाहिए तब पौधारोपण प्रवास करता है। ऐसा लगता है बांदा में आगामी जुलाई से सितम्बर तक 54 लाख पौधारोपण का तिलिस्मी आंकड़ा बिना स्थान बतलाए यूं ही कुछ फोटो से पूर्ण हो जाएगा। जैसे गत वर्षों मे होता आया है।