2 जून को दो मुकदमे एक महिला और दो पति .... एक मे हिन्दू और दूसरे में मुस्लिम पति !!!
शहर बांदा में बीते 2 जून को हुए सियासी ड्रामे की परिणति में दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। जिसमें पहले के वादी सपा नेता और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मोहन साहू है। वहीं दूसरे में गीता वर्मा है...
"यूपी के बांदा मे दिनांक 2 जून को शहर कोतवाली बांदा मे क्रमशः दो आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए। मुकदमा अपराध संख्या 274/ 2026 मे वादी मुकदमा पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मोहन साहू है। जिन्होंने आरोपी महिला का नाम गीता वर्मा पत्नी कालीचरण अंकित कराया है। वहीं गीता वर्मा ने मोहन साहू सहित 3 अज्ञात पर अपराध संख्या 277/2026 लिखाते हुए अपना नाम गीता वर्मा पत्नी नईम मोहसिन अंकित कराया है। सवाल है कि क्या एक ही दिन में गीता वर्मा के दो पति एक हिन्दू और दूसरा मुस्लिम हो सकता है ? सवाल यह भी कि क्या गीता वर्मा के पास कोई भी कानूनी दस्तावेज या विधिक मान्य कागज प्रमाण है कि वह नईम मोहसिन की धर्मपत्नी है, उन्होंने मुस्लिम रीति रिवाज से निकाह किया है ? सवाल यह भी कि क्या गीता वर्मा ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत बतौर गवाह नईम मोहसिन से निकाह किया है ? यदि हां तो फिर गीता वर्मा धर्म परिवर्तन के बाद हिन्दू दलित कैसे है? क्या कालीचरण को बिना तलाक़ दिए ऐसा मुनासिब है! सवाल यह भी कि क्या नगर कोतवाली में तहरीर लिखने वाले आंख मूंदकर कुछ भी लिख लेते है कि माननीय न्यायालय का कानूनी बोझ ऐसे मुकदमों से बढ़ता रहे और कानून हास्यास्पद बन कर रह जाए ? "
बांदा। शहर बांदा में बीते 2 जून को हुए सियासी ड्रामे की परिणति में दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। जिसमें पहले के वादी सपा नेता और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मोहन साहू है। वहीं दूसरे में गीता वर्मा है। दोनों ने एकदूसरे पर आरोप लगाये है। किन्तु प्रथम दृष्टया जैसा वीडियो सोशल मीडिया मे मोहन साहू पर प्रायोजित चप्पल कांड का वायरल है उसको देखकर कहीं नहीं दिखता कि मोहन साहू चप्पल खाने या उससे पहले दलित महिला गीता वर्मा को गालियां दिए है। या उसके साथ छेड़छाड़ जैसा अमर्यादित कृत्य घटित हुआ हो। महिला आराम से अपने लक्षित टारगेट मोहन साहू तक बिना रोकटोक प्रदीप त्रिपाठी के मोबाइल कैमरा की जद मे एक्शन के लिए तैयार होकर मोहन साहू की गाड़ी तक पहुंच रही है। कोई बीच में आता है तो कैमरा मैन प्रदीप त्रिपाठी कहते है "भैया जरा किनारे हो जाओ, ओ भाई साहब" !! ताकि प्लांट की गई दलित महिला गीता वर्मा चप्पल मारते हुए स्पष्ट दिखनी चाहिए जिससे वीडियो खबर वायरल होने पर सामाजिक तड़का, मुद्दे में सनसनी और शहर की सियासत तीनों गर्म हो सके। गौरतलब है कि उक्त घटना वीडियो में कुछ पल को बीजेपी जिलाध्यक्ष कल्लू राजपूत भी एक अन्य की मोटरसाइकिल में बैठे हुए सड़क से गुजरते दिखते है और महिला के चप्पल मारने के बाद हुई अपनी इंट्री में कुछ क्षण मोहन साहू को देखते है फिर बिना कोई हस्तक्षेप किए चले जाते है। यह घटना एक विपक्षी दल के नेता के साथ हुई बड़ी बेइज्जती थी। अलबत्ता वीडियो वायरल होते ही बांदा का साहू समाज और आम जनमानस इस घटनाक्रम पर सोशल मीडिया मे विचार विमर्श और तरह, तरह के संवाद शुरू कर देते है। खैर चप्पल खाने के बाद पता नहीं किसकी प्रेरणा या ईश्वरीय सदबुद्धि से मोहन साहू बिना गाड़ी से उतरे ही महिला से उलझे बगैर गाड़ी का शीशा चढ़ाकर चुपचाप निकल जाते है।
एक दिन दो एफआईआर और एक ही महिला के दो पति
शहर नगर कोतवाली में दर्ज 2 जून को दोनों मुकदमों का स्याह और गौर करने वाला पहलू यह है कि सपा नेता की तरफ से पहले रिपोर्ट दर्ज होती है जिसमें अपराध संख्या 274/2026 मे नामजद आरोपी दलित गीता वर्मा पत्नी कालीचरण लिखा जाता है। वहीं कुछ वक्त बाद अपराध संख्या 277/2026 वादी मुकदमा दलित गीता वर्मा पत्नी नईम मोहसिन अंकित होता है। यही एक पेंच है जो लगता है कि कोतवाली में अंधेर मची है। क्या एक ही दिन में एक महिला दो मुकदमों में शामिल है और दोनों में उसके पति हिन्दू और मुस्लिम हो सकते है ? नहीं लेकिन बांदा में यह मुकम्मल हुआ है। सवाल यह कि क्या हिन्दू दलित महिला गीता वर्मा ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत नईम मोहसिन से निकाह किया है? तब इसके प्रत्यक्ष गवाह भी होंगे और गीता वर्मा के पास कानूनी दस्तावेज भी जो निकाह को कानूनी मान्यता देते होंगे। यदि ये निकाह कालीचरण के ज़िन्दा रहते हुआ तो बिना तलाक़ कैसे संभव है कि धर्म परिवर्तन करके महिला या पुरुष विवाह/ निकाह कर सके ? यदि गीता वर्मा का नईम मोहसिन से निकाह हुआ है फिर वह दलित कैसे है? इस लोचे से लगता है कि 2 जून को लिखी गई तहरीर गंदी राजनीतिक पटकथा का हिस्सा है।
गीता वर्मा और नईम मोहसिन के रिश्ते पर सूत्रधार
शहर में मुस्लिम बिरादरी के बंदे बिना नाम लिखने की शर्त पर जानकारी देते है कि गीता वर्मा लिविंग रिलेशनशिप / व्यक्तिगत सहमति से नईम मोहसिन के यहां बतौर किराएदार रहती थी। शहर के पद्माकर चौराहा पर नईम मोहसिन का सर्किल रेट के हिसाब से बेशकीमती हाता (10 हजार स्क्वायर फीट भूखंड) है। जब नईम मोहसिन इसको बेचने लगे तो किसी की सलाह या खुद की ख्वाहिश पर गीता वर्मा ने बतौर पत्नी इसमें नईम मोहसिन से हिस्से की मांग कर डाली। किन्तु बिना दस्तावेज या कानूनी कागज के पति और पत्नी का रिश्ता सिद्ध नहीं होता है। कमोबेश यही हुआ और नईम मोहसिन ने सपा नेता मोहन साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शकील अली के लड़कों को भूखंड बेच दिया। मामला न्यायालय पहुंचा यहां भी गीता वर्मा को सफलता नहीं मिली और विवाद बढ़ता चला गया। यहीं इसमें शहर की रसूखदार राजनीति को मुद्दा मिलता है और फिर साज़िशों बनाम जुबानी जंग और षड्यंत्र का दौर शुरू हो जाता है। विडम्बना है कि समाज में कानून की गरिमा और न्यायालय की साख को ऐसी तहरीर जिसमें एक ही महिला के एक दिन में दो पति (हिन्दू और मुस्लिम) लिखे जाते हो बट्टा लगता तय है। बावजूद इसके यह हो रहा है ताकि हरिजन एक्ट के दुरुपयोग बढ़ते रहे और समाज में विवादों की लंबी अनसुलझी कहानी का कभी अंत न हो सके।