कानून व्यवस्था, महंगाई से जूझता आम और खास आदमी....क्या कहती है बांदा की जनता....

यूपी के बांदा मे शासन एवं सरकार द्वारा आम जनता के मुद्दों पर चुप्पी तोड़ने के वास्ते आज हमने ग्राउंड पर शहर के कुछ राजनीतिक, समाजसेवी...

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Apr 15, 2026 - 16:23
Apr 15, 2026 - 16:34
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कानून व्यवस्था, महंगाई से जूझता आम और खास आदमी....क्या कहती है बांदा की जनता....

"उत्तरप्रदेश के बांदा मे प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था और महंगाई रोकने के दावों पर शहर के संभ्रांत नागरिकों सहित आम जनता, फुटपाथी सब्जी वालों ने खुलकर अपनी राय रखी है।" 

बांदा। यूपी के बांदा मे शासन एवं सरकार द्वारा आम जनता के मुद्दों पर चुप्पी तोड़ने के वास्ते आज हमने ग्राउंड पर शहर के कुछ राजनीतिक, समाजसेवी और फुटपाथी सब्जी वालों से बातचीत की तो उन्होंने अपने विचार साझा किए है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित का कहना है कि जिले की बात छोड़िए जनाब सूबे की कानून व्यवस्था धड़ाम है। शहर में अपराधों पर कहां कमी आई है हां टीवी स्क्रीन पर जरूर कानून व्यवस्था चाक चौबंद है। अच्छे दिन तो इतने अच्छे है कि आम नागरिकों को हाल ही में प्रदेश के साथ बाँदा मे स्मार्ट और प्रीपेड मीटर के नाम पर खुली लूट की जा रही है। उन्होंने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि रोजाना आम जनता बेतहाशा बढ़ते बिजली के बिल से परेशान है। वहीं बांदा सहित आसपास के जिलों में लोगों का गुस्सा सड़क पर फूट रहा है। हालात यह है कि ऊर्जा मंत्री के निर्देश बावजूद उपभोक्ता को कोई राहत नहीं दी जा रही क्योंकि अभी तक राजकीय सर्कुलर विभाग नहीं पहुंचा है जिसमें स्मार्ट मीटर को प्रीपेड और पोस्टपेड करने का विकल्प दिया जाना है। जिले में ही सैकड़ों उपभोक्ताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर बिजली विभाग और निजी कंपनी पर मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया है। उधर लोगों का कहना है कि उनकी मर्जी के बिना जबरजस्ती प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे है। विरोध करने पर पुलिस केस व 10 हजार रुपये जुर्माने की धमकी दी जा रही है।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि मीटर लगने के बाद रिचार्ज किए गए हजारों रुपये अपने आप गायब हो जाते हैं और बैलेंस कम दिखाने लगता है। शहर के कई घरों के बिल अचानक माइनस में चले जाते हैं एवं बिना किसी सूचना के बिजली काट दी जाती है। यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उपभोक्ता बिल जमा कर चुका है तो फिर उसका पैसा जा कहां रहा है ? राजेश दीक्षित ने कहा कि विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने के बजाय लोगों को चक्कर कटवा रहे हैं।

वहीं लोगों ने आरोप लगाया कि यह पूरा खेल उपभोक्ताओं को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करने का है। गांव और शहर में गरीब परिवार, मजदूर और किसान सबसे ज्यादा हलकान है। बिजली विभाग की मनमानी से लोगों में भारी नाराजगी है और अब मामला सड़कों तक पहुंचने लगा है।

बिजली उपभोक्ता द्वारा ज्ञापन में मांग की गई है कि जबरन लगाए गए प्रीपेड मीटरों की जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और निजी कंपनी पर कार्रवाई हो, दोबारा पोस्टपेड मीटर की सुविधा शुरू की जाए और जिन लोगों का बिल जमा है उनकी बिजली तुरंत जोड़ी जाए। लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो बाँदा में बिजली विभाग के खिलाफ बड़ा जनआंदोलन खड़ा होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

शहर में बढ़ती महंगाई

ग्राउंड जीरो पर शहर और प्रदेश में बढ़ती मंहगाई के साथ पिसता आम नागरिक और फुटपाथी सब्जी वालों ने अपनी पीड़ा बतलाते हुए कहा कि पहले हम अपना गुजर बसर करने को अशोक लाट तिराहे पर खड़े होते है। विकास के डंडे ने हमको खदेड़ दिया। जबकि कुछ दुकानदार आज भी वहीं खड़े होते है। सब्जी विक्रेता ने कहा कि संकट मोचन मैदान के सामने हमें दीवार के अंदर बैठाल दिया गया है। यहां शहर का आदमी नहीं आता है, हम लोगों के सामने रोजीरोटी का संकट है। उधर सब्जियां और फल इतने महंगे हो चुके है कि आम उपभोक्ता खरीदने से पहले दस बार माथा पकड़ता है। वहीं गरीब आदमी यदि बीमार हो जाए तो वह अच्छे से तो छोड़िए सामान्य तौर पर हरी सब्जी और फल अपने परिवार को नहीं खिला सकता है। वीडियो में दिख रहे मौजूद सब्जी विक्रेता ने कहा कि दवाइयों के दाम भी बढ़ रहे है। इस सरकार में हर चीज महंगी हो चुकी है।

वहीं कांग्रेस महिला जिला अध्यक्ष सीमा खान ने महिलाओ की सुरक्षा के साथ एलपीजी गैस और व्यापारिक सिलेंडर की किल्लत पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता बहुत परेशान है। यह ईरान, इज़राइल और अमेरिका का युद्ध जनता पर जानबुझकर ताकतवर मुल्कों ने थोप दिया है। नेताओं और बड़े लोगों को कौन सा भूखा मरना है? होटल, ढाबे, आम लोगों के कामकाज और रसोई सब बुरी तरह प्रभावित है।

समाज सेवी एएस नोमानी ने बांदा प्रशासन को कानून व्यवस्था और पत्रकारों के साथ समाज सेवियों पर लादे जा रहे झूठे मुकदमों पर घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अदालत से मुकदमे झूठे साबित होते है तब इन गुनाहगार पुलिस वालों पर माकूल कार्यवाही क्यों नहीं होती है।