भारत समाचार और एनडीटीवी के दलाल बांदा में पत्रकारों को बेचने का करते कमाल.....

उत्तरप्रदेश के जिला बांदा मे इस वक्त लगभग दो दर्जन लाल मौरम की खदान संचालित है। वैध लीज की आड में बेख़ौफ़ होकर अवैध खनन रातदिन चलता है...

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Apr 13, 2026 - 15:22
Apr 13, 2026 - 15:38
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भारत समाचार और एनडीटीवी के दलाल बांदा में पत्रकारों को बेचने का करते कमाल.....

"यूपी के बांदा मे अवैध खनन के लिए कुख्यात थाना मटौंध अंतर्गत ग्राम मरौली में पिछले चार वर्षों के दौरान पत्रकारों को बेचने का काला खेल चल रहा है। यहां मौरम खंड 4, 5,6 में कभी खदान संचालक के गुर्गों तो कभी सिंडिकेट चलाने वाले किसी पत्रकार के माध्यम से कलमकारों की बोली लगाई जाती है। इस बार गत नवंबर माह से शुरू हुई मौरम खंड 4 जिसके संचालक है मल्लमपट्टी मुरली और बिचौलिया है नुनु झा (यह खुद को भी पत्रकार बतलाता है।) इन्होने स्थानीय हिस्ट्रीशीटर और गुंडा एक्ट में नामजद रहे संतोष यादव के भतीजे अजय यादव के द्वारा भारत समाचार के स्ट्रिंगर मनोज गोस्वामी एवं एनडीटीवी इंडिया के स्ट्रिंगर मनीष मिश्रा को बांदा के दो सैकड़ा पत्रकारों को खरीदने का मोबाइल वार्ता स्टिंग के मुताबिक टेंडर दिया है।"

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यूपी/बांदा। उत्तरप्रदेश के जिला बांदा मे इस वक्त लगभग दो दर्जन लाल मौरम की खदान संचालित है। वैध लीज की आड में बेख़ौफ़ होकर अवैध खनन रातदिन चलता है जिसमें ऊपर से नीचे तक सांठगांठ रहती है। उल्लेखनीय है कि बीते 11 अप्रैल को बांदा के सदर तहसील अंतर्गत ग्राम मरौली के खंड संख्या 4 का एक वीडियो सोशल मीडिया मे वायरल हुआ है। इसको स्थानीय दैनिक अखबार के संवाददाता एवं मान्यता प्राप्त पत्रकार राजेश पांडेय ने स्वयं खंड में जाकर बनाया था। वीडियो को देखने में पता चलता है कि राजेश पांडेय अन्य चार पत्रकारों के साथ खदान में पत्रकारों के सिस्टम को बातचीत कर रहें है। वे बार बार खदान संचालक के करीबी नुनु झा को बुलाने अथवा उनसे फोन पर बात कराने की कवायद करते है। इस बीच गांव के ही नामी अपराधी रहे संतोष यादव का भतीजा अजय यादव (मौरम खंड 4 में मैनेजमेंट देखने वाला कार्मिक) सिर पर भगवा गमछा बांधकर आता है और मौके पर मौजूद पत्रकार राजेश पांडेय से पत्रकारों के सिस्टम फिट होने का दावा करता है।

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सवाल और जवाब की नूराकुश्ती मे अजय भारत समाचार के स्ट्रिंगर मनोज गोस्वामी को अपने मोबाइल से स्पीकर खोलकर फोन लगाता है। अजय यादव भारत समाचार के स्ट्रिंगर मनोज गोस्वामी से कहता है "अजय यादव बोल रहा हूं खंड 4 से...जी बोलिए...ये क्या है भाई तुम तो कह रहे थे कि कोई पत्रकार नहीं आएगा। यहां चार पत्रकार खड़े हैं और पहले भी आए थे। तब मनोज गोस्वामी बोलते है कि कौन है, अजय हिचकिचाते हुए बोलते है कोई राजेश पांडेय है। उधर से मनोज गोस्वामी कहते है ये पोर्टल वाले है। आपको किसी से बात नहीं करनी है। इस पर राजेश पांडेय भड़क जाते है और अपना आइकार्ड दिखाते कहते कि उसको पता नहीं है क्या बोल गया है, अभी खेल हो जाएगा। फिर अजय अंत में कहते है अभी दस दिन पहले टेंडर हुआ है और मनोज वो पीटीबी वाले आशीष दीक्षित के लिए भी बोला है कोई खदान नहीं आएगा।" 

भारत समाचार और एनडीटीवी के दोनों स्ट्रिंगर बांदा में अवैध वसूली का काम कर रहें है....

पीत पत्रकारिता के हरम में थिरकते टोटा भर शराब पीकर अन्य पत्रकारों के दरवाजे में अभद्रता करते (26 दिसम्बर 2025 घटनाक्रम आशीष सागर  दीक्षित निज आवास) उक्त दोनों तथाकथित पत्रकार बांदा मे लगातार अवैध वसूली कर रहे है। इस क्रम में हाल ही में एनडीटीवी के मनीष मिश्रा पर डाक्टर प्रतीक्षा गुप्ता का वीडियो बयान बानगी मात्र है। उससे पहले नरैनी एसडीएम अमित शुक्ला के साथ खुलेआम मनीष मिश्रा की रंगबाजी सार्वजनिक तौर पर वायरल हुई थी। जब एसडीएम ने ओवर लोडिंग ट्रक को पकड़ा और पत्रकारों के ठेकेदार मनीष मिश्रा ने उन्हें ही उनकी कार्यशैली बतलाने का कीर्तिमान स्थापित किया था। इस खबर के साथ मनीष मिश्रा का हाल में हुए मामले का लिंक भी है। 
दोनों पत्रकार पर आशीष सागर दीक्षित ने कोर्ट से मुकदमा करा रखा है....

बड़ी विडम्बना ये है कि पत्रकार एवं पर्यावरण कार्यकर्ता / द प्रेस ट्रस्ट ऑफ बुंदेलखंड के फाउंडर आशीष सागर दीक्षित ने बीते 26 दिसम्बर 2025 की घटना पर कोतवाल द्वारा एफआईआर न लिखने पर जरिए सीजीएम कोर्ट परिवाद केस दायर कर रखा है। जिसमें आगामी 23 अप्रैल को सुनवाई होनी है। भड़ास मीडिया की वो खबर भी इस लिंक के साथ है। सवाल यह कि कानूनी रूप से एक दूसरे के दुश्मन बने आशीष सागर और मनीष मिश्रा, मनोज गोस्वामी का इतना दुस्साहस कैसे बढ़ा कि अपने दुश्मन को भी मरौली खंड 4 में बेचने का टेंडर लिया है? जैसा नुनु झा का गुर्गे अजय यादव बोल रहे है राजेश पांडेय से ? क्या मनीष मिश्रा को एनडीटीवी इंडिया के यूपी ब्यूरो हेड रणवीर का आशीर्वाद है ? और मनोज गोस्वामी को भारत समाचार के ब्रजेश मिश्रा ने अभयदान दिया है कि खुल्ला और छुट्टा होकर पतनशील पत्रकारिता का विश्व रिकॉर्ड बनाओ ताकि उनके चैनलों को उगाही और भुखमरी का आदर्श माडल बुंदेलखंड के बांदा से मिलता रहे ? लगातार खुलासों और कारगुज़ारी उजागर होने के बावजूद दोनों पर प्रशासन और उनके मीडिया मालिकों की रहमदिली साबित करती है कि बांदा में माफिया तंत्र, मीडिया तंत्र और ब्यूरोक्रेसी को जुगलबंदी से लाल मौरम की लूट का संगठित कारोबार अपने चरमोत्कर्ष पर काबिज है।