कागजों में हेराफेरी और बिना पर्यावरणीय एनओसी के बांदा मे धड़ल्ले से चलती लाल मौरम खदानों का रहस्य....

पैलानी तहसील के ग्राम सांडी खादर मौरम खंड 1 की लीज रजिस्ट्री सदर रजिस्ट्रार के यहां साल 2018 में सिल्वर ऑटो मोबाइल्स कम्पनी, सतना के नाम हुई है...

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May 13, 2026 - 11:55
May 13, 2026 - 11:57
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कागजों में हेराफेरी और बिना पर्यावरणीय एनओसी के बांदा मे धड़ल्ले से चलती लाल मौरम खदानों का रहस्य....

आशीष सागर दीक्षित
www.ashishsagarptb.com 

बांदा। पैलानी तहसील के ग्राम सांडी खादर मौरम खंड 1 की लीज रजिस्ट्री सदर रजिस्ट्रार के यहां साल 2018 में सिल्वर ऑटो मोबाइल्स कम्पनी, सतना के नाम हुई है। उस हिसाब से पांच वर्ष की समय सीमा खत्म हो चुकी है। किन्तु अब आरएस माइनिंग बिना पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र के यह मौरम खदान सांडी खादर खंड 1 निर्धारित क्षेत्र से बाहर बैरी बैजे मऊ (हमीरपुर) की सरहद तक लाल मौरम अवैध तरीके से खान अधिकारी राज रंजन, खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी की महती कृपादृष्टि से निकाल रही है। कमोबेश दुरेड़ी मौरम खंड की भी लीज रजिस्ट्री राजकुमार गुप्ता के नाम है जबकि टीओआर प्रपोजल नम्बर रिद्धि सिद्धि हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड के देवेन्द्र सिंह भाटी के नाम एलाट हुआ है लेकिन इसके पास भी ईसी प्रमाण पत्र (इनवायरमेंट क्लीरियंस एनओसी ) नहीं है। खान अधिकारी के कारनामे इतने बुलंद हैं कि मरौली खंड 4 की खनन कंपनी मेसर्स अगस्त्य एग्रो प्राइवेट लिमिटेड जिसके निदेशक मल्लमपति मुरली है। इन्हें स्वीकृत गाटा संख्या 333/7, 412,413 एवं 414 क्षेत्र 23 हेक्टेयर में खनन परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोक जन सुनवाई सदर तहसील पत्र संख्या 321/Parya/SIA/8288/2023 दिनांक 23 नवंबर 2023 को टर्म्स आफ रिफरेंस नम्बर दिया गया था। लेकिन इनके पास भी पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है। वहीं इसकी लीज रजिस्ट्री मेसर्स वीपी कंस्ट्रक्शन प्रोपराइटर विजय पाल प्रजापति के नाम 2021 मे हुई थी। इसी तर्ज पर मरौली मौरम खंड 6 की लीज रजिस्ट्री 2020 मे थिंक होम इंफ्राबुल्ड प्राइवेट लिमिटेड के नाम हुई है किन्तु वर्तमान में इसको कानपुर के आनंद गुप्ता की कंपनी आनंदेश्वर केमटेक प्राइवेट लिमिटेड चला रही है। इनके पास भी ईसी एनओसी नहीं है। गौरतलब है कि यदि जनता और  खनन प्रभावित गांववासियों को लोक जनसुनवाई के प्रशासनिक कार्य वृत्त / मिनट्स की छायाप्रति उपलब्ध करा दी जाए तो बांदा जिले में जनता और ग्रामीणों के साथ खान अधिकारी के खनिज विभाग, राजस्व विभाग, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड विभाग के स्याह काले रहस्य उजागर हो जाएंगे। टेबल टास्क (दफ्तर में बैठकर) जांच आख्या और शासन को पत्राचार करने की कार्यशैली ने एनजीटी सहित माननीय सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को ताक पर रख दिया है। विडम्बना है कि इस अवैध मौरम उठान की कबूतर बाजी के खेल में प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तासीर भी बेहद गंदी और बदबूदार हो चुकी है। जिसके ऑडियो और वीडियो गाहेबगाहे वायरल होते रहते है।