कागजी पौधरोपण की स्याह कालिख से बेजार होता बुंदेलखंड...
आने वाले 25 वर्षों मे बुंदेलखंड जैवविविधता को खत्म करते हुए अपने ईको सिस्टम को नेस्तनाबूद करने वाला...
आशीष सागर दीक्षित
"उत्तरप्रदेश के सात जिलों वाले बुंदेलखंड क्षेत्र मे बीते दो दशकों से प्राकृतिक उजाड़ के दो बड़े कारण स्पष्ट रूप से सामने है। जिसमें ग्रेनाइट और लाल मौरम के भयावह उत्खनन के साथ कागजी अर्थात फर्जी पौधरोपण शामिल है। जिस द्रुत गति से यह दोनों पहलू बुंदेलखंड को पर्यावरणीय क्षति पहुंचा रहें है आने वाले 25 वर्षों मे बुंदेलखंड जैवविविधता को खत्म करते हुए अपने ईको सिस्टम को नेस्तनाबूद करने वाला चटियल और बंजर बुंदेलखंड बनेगा।"
बांदा/बुंदेलखंड। यूपी, एमपी बुंदेलखंड में वर्तमान भौगोलिक नक्शे के अनुसार कुल 13 जिले है। जिसमें सात यूपी और 6 जिले मध्यप्रदेश से विंध्याचल पट्टी में आते है। इसमें चित्रकूट मंडल से बांदा, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट है। वहीं झांसी मंडल में झांसी, ललितपुर, जालौन जिले है। एमपी बुंदेलखंड में छतरपुर,पन्ना, टीकमगढ़,अशोक नगर,सागर संभाग,भिंड और मुरैना बोलचाल की बसावट में बुंदेली है। वैसे तो बांदा में अवधि का ठेठपन समाहित है इसलिए आम बोलचाल में बांदा और चित्रकूट मौलिक बुंदेलखंड नहीं लगते है। यूपी बुंदेलखंड के साथ सरकारी योजनाओं के पर्यावरण संरक्षण हेतु चल रहे कार्यक्रम ने यहां सर्वाधिक नुकसान किया है। क्योंकि प्रशासन के स्तर पर धरातल में अनुश्रवण का बहुत बड़ा गोलमाल है। उदाहरण से समझें तो उत्तरप्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड में रिकॉर्ड तोड़ हरित क्रांति कागजों में की है। इसके इर्दगिर्द यूपी राज्य सरकार ने एक दिन में सर्वाधिक पौधारोपण का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड 6 बार बनाया है। जुलाई से सितंबर तक हर साल वनविभाग को बड़ी जिम्मेदारी पौधारोपण की दी जाती है। इसके साथ अन्य सरकारी विभागों को भी लक्ष्य वार पौधारोपण करना होता है। मुख्यमंत्री योगी की सरकार ने अपने कार्यकाल में आंकड़ों के आधार समूचा बुंदेलखंड हराभरा कर दिया है। उससे पहले यह काम समाजवादी और बसपा राज्य सरकार मे स्थानीय स्तर पर एनजीओ को नोडल एजेंसी बनाकर किया गया था।
बसपा सरकार मे पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी ने विशेष पौधारोपण अभियान के तहत यूपी बुंदेलखंड मे मनरेगा योजना से 10 करोड़ स्पेशल ट्री प्लांटेशन प्रोग्राम चलाया था। तत्कालीन ग्राम्य विकास मंत्री और वर्तमान सपा नेता दद्दू प्रसाद ने इसके लिए चित्रकूट स्थित गैर सरकारी संगठन अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान को इस कार्यक्रम की नोडल एजेंसी बनाया था। सवाल यह कि आज धरातल पर वह 10 करोड़ पौधे कितने जीवित है ? उनमें से दस फीसदी भी क्या पेड़ बन सके है ? वहीं सड़को के चौड़ीकरण ने बुंदेलखंड में ताबड़तोड़ पुराने पेड़ो का कटान किया है। बानगी के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण में ही 1 लाख 90 हजार पुराने पीपल,महुआ,शीशम,नीम जैसे दरख़्त काट दिए गए है। इसके सापेक्ष कार्यदाई संस्था यूपीडा को काटे गए पेड़ों के स्थान पर पर्यावरण एनओसी की शर्त अनुसार उसी प्रजाति का पौधरोपण करना था। केंद्र सरकार की अनुमति से बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की विकासवादी राहों में आने वाले 1,89,036 पौधे और 1261 पेड़ो को काटा गया। संभवतः ग्राउंड पर यह आंकड़ा इससे ज्यादा ही होगा। वहीं बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर ग्रीन बेल्ट विकसित की जानी थी जिसमें 948 हेक्टेयर वन क्षेत्र विकसित होने का दावा किया गया था। यूपीडा और वनविभाग को यह पौधे लगाने थे। लेकिन 4 लेन तारकोल की बलखाती सड़क के डिवाइडर वाले स्थान पर शोबाजी के पौधे लगाकर विकास का खाका खींच दिया गया। आज इस घपले पर सवाल उठाने वाला कोई नहीं है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे मे नष्ट की गई हरियाली
सरकार के आंकड़ों पर गौर करें तो बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे मे ही चित्रकूट में 5 पौधे, 159 पेड़ काटे गए। बांदा में 16 पौधे, 625 पेड़ काटे गए। महोबा मे 3479 पौधे, 86 पेड़ काटे गए। हमीरपुर में 172 पौधे, 286 पेड़ काटे गए। जालौन में 232 पौधे, 97 पेड़ काटे गए। औरैया में 1,72,477 पौधे,8 पेड़ काटे गए गए। इटावा में 12665 पौधे काटे गए। इसके सापेक्ष कार्यदाई संस्था यूपीडा को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे मे क्रमशः बांदा मे 8 हेक्टेयर, चित्रकूट में 53 हेक्टेयर, महोबा मे 2.4868 हेक्टेयर, हमीरपुर मे 10.65 हेक्टेयर, जालौन में 4.04 हेक्टेयर, औरैया में 22.9393 हेक्टेयर, इटावा में 7.30 हेक्टेयर, आरओडब्ल्यू एवं मीडियन 840 हेक्टेयर अर्थात कुल 948.4161 हेक्टेयर ग्रीन बेल्ट विकसित करना था। किन्तु आज तक धरातल पर यह संभव नहीं हुआ है। गाहेबगाहे किए गए शोबाजी के पौधरोपण से जनता और राहगीरों को शीतल छाया सड़क के डीवाईडर से दी जा रही है।
उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा किया गया पौधरोपण
बसपा, सपा और भाजपा राज्य सरकार ने हर वर्ष 90 फीसदी कागजी जियो टैगिंग पौधरोपण किया गया। एक दो दिन तामझाम के साथ माननीयों और अधिकारियों की जमात में कैमरे चलते है और रिकॉर्ड तोड़ पौधरोपण खत्म हो जाता है। बुंदेलखंड में पिछले दो दशक के अंतराल में जितना सरकारी पौधारोपण किया गया है उसके हिसाब औसत जनसंख्या घनत्व के मद्देनजर हर घर में जंगल खड़ा होता। आंकड़ों की मानें तो साल 2021 तक चित्रकूट मंडल में ही 3.90 करोड़ पौधारोपण किया गया। जबकि 81.5 लाख परिवार है। इस हिसाब से पेड़ो का आंकड़ा गत 2021 तक 2638 प्रति वर्ग किलोमीटर होता है। चित्रकूट मंडल में चार जिले है और प्रति वर्ग किलोमीटर 1270 जनसंख्या घनत्व 2011 की जनगणना का है। वहीं 47,71,363 जनसंख्या मंडल की है। यहां 8,51,493 परिवार है। नजीर देखिए कि साल 2020 और 2021 मे ही क्रमशः 1,80,8300 और 2,09,32,657 लाख पौधारोपण हुआ है। इस नजर से प्रति वर्ग किलोमीटर 317 आबादी के औसत पर 2638 पेड़ आते है। यह महज दो साल के पौधारोपण का आंकड़ा है। इससे उलट यूपी में साल 2024-2025 मे 36 करोड़ पौधारोपण किया गया है। जबकि साल 2023-2024 मे यह 30 करोड़ पौधारोपण था। वहीं साल 2022-2023 में 25 करोड़ पौधारोपण हुआ था। जबकि साल 2022-2021 20 करोड़ पौधारोपण प्रदेश में किया गया था। चित्रकूट मंडल में वर्ष साल 2019 से 2022 तक 10,037,478 पौधे रोपित होने का दावा है। इसके अतिरिक्त वनविभाग एनएफसीसी, जायका योजना से बुंदेलखंड में लाखों पौधारोपण कागजों में कर चुका है। यहां मंडल के तीन जिलों बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर मे ही एनएफसीसी योजना से 753 हेक्टेयर क्षेत्रफल में साल 2021 तक 7,09,075 पौधारोपण पर 11.23 करोड़ रुपए खर्च हो चुके है। वनविभाग के सरकारी आंकड़े बतलाते है कि साल 2021 में अकेले बांदा के अंदर 36.88 लाख पौधारोपण किया गया था। इस वर्ष सूबे में 25 करोड़ पौधारोपण अभियान भी बड़ी,बड़ी होर्डिंग लगाकर चाक चौबंद व्यवस्था में होने का परचम मुख्यमंत्री जी लहराए थे। बांदा में तत्कालीन मंडल आयुक्त दिनेश कुमार और डीएम रहे आनंद कुमार सिंह, डीएफओ संजय अग्रवाल, प्रभारी सीडीओ सुधीर कुमार ने इस उपलब्धि पर दर्जनों फोटो अखबारों में भेजने का काम किया था। मार्केटिंग इस तरह की गई थी कि अतर्रा के पहाड़िया दाई में पौधरोपण के लिए भंडारे का आयोजन सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी के सानिध्य में संभव हो सका था। साल 2021 में चित्रकूट मंडल के चारों जिलों में दो करोड़ से ज्यादा पौधरोपण किया गया था। वहीं अन्य विभागों को 1.19 करोड़ पौधे लगाने थे। बावजूद इसके बांदा सहित समूचा बुंदेलखंड 33 फीसदी राष्ट्रीय वन नीति के मानकों से कोसों दूर खड़ा रहा। कमोबेश यह आज भी बदस्तूर इसी मुकाम पर है।
दो दशक में बुंदेलखंड का औसत वन क्षेत्र
यूपी बुंदेलखंड मे वनविभाग का औसत वन क्षेत्र पिछले दो दशक में थोड़ा बहुत आगे,पीछे दौड़ता रहता है। जन सूचना अधिकार के संख्या पर नजर डाले तो साल 2010 में बांदा का वन क्षेत्र 1.21 फीसदी था। यह साल 2022 तक 2.31 फीसदी बढ़ सका। वहीं कार्यालय वनविभाग प्रभागीय वन अधिकारी बांदा श्री अरबिंद कुमार के सौजन्य से मिली जानकारी पत्रांक संख्या 2622/ 26-1 (जन.सूचना)/ दिनांक 5 फरवरी के बिंदु नम्बर 8 पर अंकित तथ्य कहते है कि बांदा का वर्तमान में वन क्षेत्रफ़ल 5193.547 हेक्टेयर है। जबकि कुल भूभाग का वन क्षेत्रफ़ल मात्र 2.30 प्रतिशत है। यानि दो दशक बाद भी सरकारी तंत्र करोड़ो रुपए हजम करने और करोड़ों पौधारोपण के बाद ढाई फीसदी जंगल होने का दायरा नहीं छू सका है। आरटीआई की यह जानकारी बतलाती है कि बांदा में वर्ष 2024-2025 मे कुल 67.20304 लाख पौधारोपण किया गया था। वहीं इस साल बांदा में 54 लाख से ज्यादा पौधारोपण होना है। इसकी विभागीय मीटिंग डीएम अमित आसेरी संबंधित विभागों के साथ गत अप्रैल माह ले चुके है।
हाईकोर्ट में लंबित याचिका कूड़ा बन गई है
इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका 70478/2020 आज समय के साथ कूड़ा बन चुकी है। जिसमें बुंदेलखंड के अंदर दस साल में हुए पौधरोपण की सीबीआई जांच कराने की प्रार्थना याची ने मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट से की थी। किन्तु 4 चीफ जस्टिस बदल गए और उनमें सरकार के खिलाफ आदेश देने एवं यहां पर्यावरणीय नुकसान कराने की जांच हेतु कार्यवाही को अमलीजामा पहनाने का कर्मठ कार्य मुनासिब नहीं हो सका है।
बुंदेलखंड के साथ जनपदों मे औसत वन क्षेत्र..
सूचना अधिकार से अब तक मिले व्यक्तिगत जानकारी को कोड करें तो साल 2022 तक यूपी बुंदेलखंड के सात जनपदों में क्रमशः बांदा 2.31 %, महोबा 5.14 %, जालौन 5.42 %, हमीरपुर 5.65 %, झांसी 6.05 %, ललितपुर 11. 54 % , चित्रकूट 19.64 % है। यह आंकड़े फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया 2021 की रिपोर्ट में भी उल्लिखित है। बुंदेलखंड में ललितपुर और चित्रकूट में आंशिक नैसर्गिक जंगल कुल भूभाग का शेष है। यहां पहाड़ और जंगल होने से कुछ राहत है लेकिन बावजूद इसके एक भी जिला राष्ट्रीय वन नीति 33 फीसदी जंगल के करीब तक वनविभाग की स्थापना से आज तक नहीं पहुंचा है। सवाल यह है कि तब हर वर्ष करोड़ों पौधारोपण और उसमें खर्च भारीभरकम बजट, सरकारी तामझाम के क्या मायने है? क्या यह सिर्फ विश्वरिकार्ड को बैलेंस करने का खोखला अभियान है जो बुंदेलखंड के साथ उत्तरप्रदेश को भी बेजार कर रहा है!!!