बांदा के एसडीएम नरैनी से बदसलूकी करता एनडीटीवी का स्ट्रिंगर मनीष मिश्रा......!!!

वीडियो अनुसार स्पष्ट है कि एनडीटीवी के स्ट्रिंगर, पत्रकार को ग्रामीण लोगों ने मौके पर बुलाया। क्योंकि पत्रकार बांदा शहर से अनायास वहां कैसे पहुंचा यह भी सवाल है...

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Mar 19, 2026 - 10:35
Mar 19, 2026 - 10:47
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बांदा के एसडीएम नरैनी से बदसलूकी करता एनडीटीवी का स्ट्रिंगर मनीष मिश्रा......!!!

आशीष सागर दीक्षित

" इन वीडियो में बोली जा रही भाषा क्या पत्रकार की पाठशाला से निकली है ?  या बांदा के चौतरफा फैले खनन माफिया के पैरोकार की दबंगई है ? घटना मुताबिक़ बांदा मे अवैध लाल मौरम खनन और बालू चोरी करने वालों पर नकेल कसते एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला से एनडीटीवी पत्रकार मनीष मिश्रा की गुंडई आखिर किसके इशारे पर हो रही है ? गौतम अदानी के न्यूज चैनल स्ट्रिंगर क्या खनन माफियाओं के हमराह बन चुके है ? ऑटो चालक से पत्रकार बने स्ट्रिंगर के सामने लाल सोने की चमक भारी है।...."

बांदा। एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला लगातार अपने कार्यक्षेत्र मे लाल मौरम के अवैध निकासी और ओवरलोडिंग परिवहन पर सक्रिय रहते है। कुछ माह पूर्व भी उनका विवाद एक ओवरलोड ट्रक चालक को पकड़ने के चलते सत्ता पक्ष के कद्दावर लोगों से हुआ था। यह मामला मीडिया मे इतना उछला कि एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला को विवादों में घिरे रहने वाला अधिकारी का तमगा देकर गोदी से मीडिया ट्रायल चलवाया गया। वहीं वे लगातार रूटीन चेकिंग के मद्देनजर बीते बुधवार 18 मार्च की देर शाम भ्रमण पर निकले थे। थाना गिरवा अंतर्गत बड़ोखर बुजुर्ग गांव के पास उन्होंने एक ट्रक चालक कुलदीप तिवारी को रुकने का इशारा किया।

बकौल एसडीएम नरैनी मध्यप्रदेश के रामपुर घाट से लाल मौरम लदा ट्रक रुकने की जगह तेज रफ्तार से निकलता हुआ उनके साथ मौजूद होमगार्ड को टक्कर मार कर भागने लगा। इस पर उन्होंने पीछा किया। ट्रक चालक कुलदीप तिवारी ने एसडीएम मुताबिक उनकी गाड़ी में टक्कर मारी जिस पर घेराबंदी करके जब ट्रक चालक को पकड़ा तो वह विवाद करने लगा। इस अफरातफरी माहौल को देखकर वे लोग जो लाल अवैध मौरम निकासी को बढ़ावा देते है। जिनके ट्रैक्टर आदि बिना रॉयल्टी अवैध मौरम ढुलाई करते रहते है उन्होंने माहौल बिगाड़ने को नारेबाजी शुरू कर दी। वहीं वीडियो अनुसार स्पष्ट है कि एनडीटीवी के स्ट्रिंगर, पत्रकार को ग्रामीण लोगों ने मौके पर बुलाया। क्योंकि पत्रकार बांदा शहर से अनायास वहां कैसे पहुंचा यह भी सवाल है। अपने रसूखदार चैनल एनडीटीवी की लाल माइक आईडी को एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला के सामने अड़ाकर बेहूदा लहजे से सवाल पूछने का काम करने लगे। उक्त पत्रकार मनीष मिश्रा ने लाल माइक की ठसक पर एसडीएम की कार्यशैली पर गर्माहट से सवाल खड़े किए। वहीं अवैध खनन और ओवरलोड समर्थक ग्रामीण एसडीएम के खिलाफ खड़े होकर मौका परस्ती में  हल्ला मचाने लगे।

गौरतलब है कि इस बहसा बहसी में ट्रक चालक को पकड़कर एसडीएम के दलबल ने गाड़ी में बैठा लिया किन्तु जनबल का समर्थन पाकर ट्रक चालक कुलदीप तिवारी धीमी रेंगती गाड़ी से उतरकर भाग निकला। बाद मे पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। उधर जानकारी मुताबिक एसडीएम अमित शुक्ला ने ट्रक सीज कर दिया है। उक्त घटनाक्रम की सूचना पाकर थाना गिरवा इंस्पेक्टर सुरेश सैनी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीण जनों को शांत करते हुए स्थिति को नियंत्रण में किया गया। काबिलेगौर है कि इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया मे डालकर एनडीटीवी के स्ट्रिंगर मनीष मिश्रा ने एसडीएम नरैनी अमित शुक्ला को एक बार फिर राबिनहुड साबित करने की कवायद में आरोप बयानी करते हुए अपनी फेसबुक प्रोफाइल में खुद को जुझारू व जमीनी पत्रकार होने का स्टंट करने का अवसर खोने नहीं दिया। बतलाते चले कि एनडीटीवी इंडिया के वर्तमान मालिक पूंजीपति गौतम अदानी है। देश के खनिज सम्पन्न राज्य छत्तीसगढ़,झारखंड आदि मे इनकी कोयला खनन की खदानों में सिस्टम की दरियादिली से इनका रुतबा देखते बनता है। आज देशभर में सोलर प्लांट से लेकर एसीसी अदाणी सीमेंट और अन्य सेक्टर में देश के दिग्गज निवेशक बनकर गौतम अदानी मीडिया के लाल माइक एनडीटीवी इंडिया पर भी मालिकाना हक ले चुके है। छत्तीसगढ़ में कोल माइनिंग के लिए सैकड़ों हेक्टेयर हसदेव जंगल को काटने के लिए पीढ़ियों से जंगलों में बसे हजारों आदिवासियों को जंगल बचाने के क्रम में राज्य की सत्ता का समर्थन पाकर उजाड़ दिया गया है। वहीं इन जंगलों के वन्यजीवों खासकर हाथियों का प्रवास स्थल नष्ट हुआ जो अब रिहायशी आबादी पर हमलावर होते है।

बावजूद इसके कोयला खनन रोका नहीं गया। क्योंकि केंद्र सरकार की सीधी कृपा और देश की बैंकों से हजारों करोड़ का ऋण लेने को इनके लिए दरवाजे हमेशा खुले रहते है। खास बात है कि सत्ता गठजोड़ से बैंक सब्सिडी मिलती है जो आम किसानों को ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। वहीं इनका कर्ज माफ भी हो जाता है। सवाल यह कि क्या मेनस्ट्रीम मीडिया अब यूं ही अवैध खनन और उससे जुड़े परिवहन का रास्ता दुरुस्त करेगा। तब जब कोई अपवाद में जिले का अधिकारी कार्यवाही के लिए सड़क पर निकलने की जहमत करता है।