सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना करते हुए अधिवक्ता को हथकड़ी लगाकर कोर्ट में किया पेश..
आम आदमी को भी बतौर मुल्जिम पुलिस माननीय कोर्ट में हथकड़ी लगाकर पेश नहीं करेगी ऐसा सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन एवं निर्देश है। इसी कारण जेल से कोर्ट परिसर पेशी...
बांदा। आम आदमी को भी बतौर मुल्जिम पुलिस माननीय कोर्ट में हथकड़ी लगाकर पेश नहीं करेगी ऐसा सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन एवं निर्देश है। इसी कारण जेल से कोर्ट परिसर पेशी में आए कैदी को लॉकप से सिपाही बिना हथकड़ी लाते है। गाहेबगाहे यदि कोई हार्ड कोर क्रिमिनल है जिसके फरार होने या कोर्ट परिसर में भी अपराध जैसी घटना करने का अंदेशा हो तो पुलिस हथकड़ी लगाकर कोर्ट ले जाती है किन्तु न्यायालय कक्ष के बाहर ही मुल्जिम की हथकड़ी खोल दी जाती है। उधर यूपी के बाँदा मे स्थानीय पुलिस द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशो की अवमानना करते हुए एक अधिवक्ता को सार्वजनिक रूप से सरकारी पुलिस वाहन में हथकड़ी डालकर बिठाकर ले जाया गया। खबर की तस्वीर में हथकड़ी लगाए दिख रहे बांदा जिला सत्र एवं न्यायालय के अधिवक्ता गोपाल दीक्षित है। इन्हें बीते दिन इंस्पेक्टर प्रभूनाथ यादव द्वारा हथकड़ी लगाकर चालान काटते हुए माननीय न्यायालय परिसर लाया गया। फिर कोर्ट में पेश किया गया। गौरतलब है कि गोपनीय सूत्रधार एवं सोशल मीडिया खबरों की मानें तो अधिवक्ता का पारिवारिक जमीनी विवाद वादी मुकदमा से है। यह पुलिस के हेड मुहर्रिर है। खाकी का बेजा लाभ लेते हुए पुलिसिया रुआब पर अधिवक्ता गोपाल दीक्षित को पाक्सो एक्ट मे मामला दर्ज करके जेल भेज दिया गया है। सूत्रधार बतलाते है कि कुछ पुलिस की मदद से वादी मुकदमा मुल्जिम बने अधिवक्ता गोपाल दीक्षित की जमीन मे कब्जा करना चाहते है। इसलिए यह खुन्नस निकली है। खैर उक्त कथित अपराध की जमीनी सच्चाई चाहे जो हो किन्तु सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और अपराधी की निजता एवं सुचिता का ध्यान खाकी के रहनुमाओं को रखना चाहिए। जिससे कल ट्रायल कोर्ट में उनकी कार्यशैली पर आक्षेप न लग सके। यह घटनाक्रम बेहद निंदनीय है। अधिवक्ताओं इस मामले पर गहरा आक्रोश है।