पैलानी के सांडी मे मौरम खण्ड एक संचालक ने आते ही ग्यारह लोगों पर लिखाया रंगदारी का मुकदमा....

पैलानी तहसील के ग्राम सांडी में लाल मौरम खदान पट्टेधारक खंड एक ने बीते 24 मार्च को चैत नवरात्रि मे कन्याभोज कराकर खदान का श्रीगणेश किया है...

PTBPTB
Mar 26, 2026 - 16:50
Mar 26, 2026 - 16:51
 0
पैलानी के सांडी मे मौरम खण्ड एक संचालक ने आते ही ग्यारह लोगों पर लिखाया रंगदारी का मुकदमा....

आशीष सागर दीक्षित

"बुंदेलखंड के बांदा मे बाहरी प्रदेशों और जिलों से लाल मौरम का कारोबार करने आते है। जिसमें कुछ मौरम खदान संचालक बड़ी कम्पनी या ग्रुप के माध्यम से पहले तो इलाके के रसूखदार लोगों या सफेदपोश माननीयों को पाले में करते है।फिर प्रशासन को साधते है। उसके बाद मीडिया मैनेजमेंट होता है। गाहेबगाहे यदि कोई व्यक्ति इनके प्रभाव में नहीं आया या फिर जो किसान या सामाजिक कार्यकर्ता अथवा पत्रकार इन लाल मौरम की खदानों में अवैध खनन, ओवरलोडिंग आदि का विरोध करता है। अथवा किसी ने खदान से सड़क तक परिवहन निकासी में किसान से अनुबंध करा लिया होता तब अपने रास्तों पर रोड़ा बनकर खड़े ऐसे तत्वों पर यह कद्दावर खनन पट्टेधारकों का कुनबा तुंरत रंगदारी,धमकाने आदि की पटकथा लिखकर हल्के की थाना चौकी से मुकदमा लिखवा देता है।" 

बांदा। पैलानी तहसील के ग्राम सांडी में लाल मौरम खदान पट्टेधारक खंड एक ने बीते 24 मार्च को चैत नवरात्रि मे कन्याभोज कराकर खदान का श्रीगणेश किया है। उद्घाटन में लगभग 50 लक्जरी गाड़ियों के काफिले से माहौल बनाया गया। उधर गांववासियों की सूचना मुताबिक इसके पूर्व रात्रि मे एक दिन बाहरी बालाओं ने ग्रामीण लोगों का मनोरंजन भी किया था। मंगलवार को शुरू हुई खदान के संचालक गाजियाबाद के अंकित सिंह बतलाए जा रहें है। जानकारी अनुसार पट्टेधारक अंकित सिंह गाजियाबाद के सेक्टर 4, वैशाली, थाना इंद्रापुरम रहवासी है। गौरतलब है कि किसी भी खदान को जमीन पर शुरू करने से पहले पहला चरण जनसुनवाई होता है। इसके बाद पर्यावरण एवं जल वायु एनओसी मिलती है। वनविभाग से भी सड़क मार्ग,वन भूमि से 100 मीटर की दूरी तक खनन नहीं करने की एनओसी लेनी होती है। इसके बाद गांव क्षेत्र के किसानो को बातचीत से मनाकर रास्ता लिया जाता है। इस गोलबंदी में यदि पट्टेधारक से इतर किसी बाहरी या स्थानीय पहुंच वाले आदमी ने खेतों से रास्ता एग्रीमेंट किसानों द्वारा अपने नाम ले लिया तो कायदे की घेराबंदी खदान संचालक की हो जाती है। यही कुछ हुआ सांडी मौरम खंड एक में, जहां खदान से सड़क तक परिवहन निकासी का रास्ता कुछ किसानों से खपटिंहा कला के राहुल सिंह ने ले लिया था। यह खदान संचालक अंकित सिंह की राह का स्पीड ब्रेकर बन रहे थे। वहीं खपटिंहा कला के ही पूर्व दैनिक जागरण तहसील सूत्रधार और अब नवसत्ता दैनिक के संवाददाता महेश द्विवेदी,मोहित शुक्ला उर्फ छोटा, मधुराज शर्मा, रुद्र प्रताप सिंह उर्फ सोनू, शोभित, जवाहर लाल तिवारी आदि ने मौरम पट्टेधारक अंकित सिंह पर खनन कारोबार में दबाव बनाने का माहौल बनाया था। जिससे दुराग्रह रखते हुए सांडी खंड एक के लीज होल्डर अंकित सिंह ने सात नामजद और चार अज्ञात लोगों के ऊपर 25 लाख रुपया रंगदारी और अंगभंग करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। तहरीर कर्ता ने एफआईआर में लिखा कि उपरोक्त सातों लोग महेश द्विवेदी के साथ गिरोह बनाकर वसूली करते थे। खदान संचालक से बीते 15 मार्च को शाम 6 बजे मौरम खनन रस्ते गौशाला के पास मिलकर दो लाख रुपए ले लिए। वहीं बकाया रुपया जल्दी देने की धमकी दी है। ऐसा न करने पर खदान संचालन में बाधा और सकुशल न चलाने देने की धमकी दी है। पट्टेधारक ने मोहित शुक्ला और राहुल सिंह को एचएस बताया है। 

पूर्व में सांडी मौरम खंड 77 ने भी दो बार लोगों पर रंगदारी मांगने के मुकदमे लिखाए है....

बांदा मे लाल मौरम खदान संचालक अब अक्सर किसी के विरोध करने पर थाना सेटिंग से महिला या पुरुष पर मुकदमा लिखवा देते है। पूरी पटकथा सुनियोजित होती है। सांडी मौरम खंड 77 ने गांव की एक महिला सहित खपटिंहा कला निवासी एक व्यक्ति पर बीते दिनों कुछ ऐसा ही मुकदमा लिखवाया था। यह जरूर है कि आनन फानन में लिखे गए यह मुकदमे न्यायालय में ठहर नहीं पाते है।

मौरम खंड सांडी खंड एक के पास है केन कैनाल का बांध

पैलानी के सांडी गांव में 24 मार्च को शुरू हुई मौरम खंड एक बैरी, बैजेमऊ आसपास है। जहां निचले हिस्से में कई गांवों को सिंचाई और आम जल आपूर्ति कराने वाला केन कैनाल बांध भी है। यहीं पास ही ऊपरी हिस्से पर स्थित है खंड नम्बर एक मौरम खदान का रकबा। या यूं कहिए कि केन कैनाल बांध के सामने से मौरम खंड एक खदान। अचंभे वाली बात है पर्यावरण जल और वायु एनओसी स्थलीय सत्यापन कैसे मुनासिब हुआ है। मंडल में बैठे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने तो जैसे आंख ही मूंद ली है। वो एनजीटी की टीम आने के वक्त हो या सामान्य दिनों में माइनिंग स्थल के अनुश्रवण की बात। खदान से लगा हुआ केन कैनाल होने पर स्थानीय जानकार एवं किसान कहते है कि यदि गर्मी के दिनों में बेलगाम खनन खंड एक से हुआ। या ग्राम सभा और खंड से बाहर अवैध खनन होता है तो उक्त केन कैनाल का बांध प्रभावित हो जाएगा। इलाके मे पानी का संकट खड़ा होगा जिससे जलधारा टूटने लगेगी। अब देखना होगा कि पर्यावरण और जल वायु एनओसी लिए सांडी खंड एक खदान संचालक कितनी नैतिकता से अपना स्याह और सफेद मौरम कारोबार करते है। मजेदार बात यह भी है कि इस खंड को मौरम परिवहन निकासी में वनविभाग ने भी रास्ता दिया है।