बांदा में खनन का 'खेल' : जांच टीम के आते ही गड्ढे बराबर, जाते ही नदी में फिर तन गए अवैध पुल

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) मे आज बांदा के पैलानी क्षेत्र की सांडी खंड 77 मामले की सुनवाई थी। बीते दिन 18 फरवरी को एनजीटी के निर्देश पर ज्वाइंट कमेटी की चार सदस्यीय...

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Feb 25, 2026 - 16:08
Feb 25, 2026 - 16:14
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बांदा में खनन का 'खेल' : जांच टीम के आते ही गड्ढे बराबर, जाते ही नदी में फिर तन गए अवैध पुल

आशीष सागर दीक्षित
(याचिकाकर्ता एनजीटी)
पत्रकार व पर्यावरण पैरोकार

"राष्ट्रीय हरित अधिकरण की मुख्य न्यायिक पीठ के समक्ष ज्वाइंट कमेटी ने अभी तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।जिससे सरकार के पैरोकार अधिवक्ता ने एनजीटी प्रिंसिपल बेंच से वक्त मांगा है। उधर बांदा के पैलानी खंड 77 मे आज सुबह 25 फरवरी को ही केन नदी की मेन स्ट्रीम जलधारा मे दो पोकलैंड लगाकर अवैध खनन खंड सीमा से बाहर जाकर किया जा रहा था। किसानों ने जीपीएस वीडियो किया जो इस बात की तस्दीक करता है कि पट्टेधारक को कानून का रत्तीभर भय नहीं है।"

बांदा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) मे आज बांदा के पैलानी क्षेत्र की सांडी खंड 77 मामले की सुनवाई थी। बीते दिन 18 फरवरी को एनजीटी के निर्देश पर ज्वाइंट कमेटी की चार सदस्यीय टीम ने बांदा आकर जांच की औपचारिकता पूरी की थी। मजेदार तथ्य है कि जांच टीम मे क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य भी थे। जिनकी रहनुमाई मे बांदा की समस्त मौरम खंडों मे पर्यावरण एनओसी अर्थात जल और वायु अनापत्ति प्रमाण पत्र की शर्तों का उल्लंघन किया जाता है। वहीं जिला खान अधिकारी राज रंजन, खान इंस्पेक्टर गौरव गुप्ता एवं एडीएम राजस्व / वित्त धर्मेद्र कुमार भी मौके पर उपस्थित थे। जबकि इन्हीं के चलते दिनरात एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय व उत्तरप्रदेश सरकार की मंशा के विपरीत ताबड़तोड़ अवैध खनन अर्थ मूविंग मशीनों से किया जाता है। जांच समिति के आने के एक दिन पूर्व ही खंड के सभी भारीभरकम गड्ढों को समतल कर दिया गया। जलधारा में निर्मित अवैध पुल तोड़ दिया गया। गांव के पार्क में प्राइमरी स्कूल के बच्चों से पौधरोपण कराया गया। वहीं जांच टीम जाने के दिन शाम से ही पुनः अवैध पुल बनकर तैयार हो गया था।

गौरतलब है हर पांच साल मे जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) बांदा की सरकारी वेबसाइट www.banda.nic.in पर प्रकाशित की जाती है। साल 2019 के बाद यह 2024 मे अपलोड की गई है। वहीं करीब 600 से अधिक पेजों की डीएसआर रिपोर्ट में जिन मौरम खंडों की वैधता तिथि समाप्त हो चुकी है वे भी रनिंग मे दिखाया जा रहा है। साथ ही ज्यादातर खंडों को EXCEEDING दिखा रहें है। वहीं प्रस्तावित मौरम खंडों की लिस्ट नहीं है। यह डीएसआर रिपोर्ट भारत सरकार के प्रवेश पोर्टल पर ही मौजूद है।  उधर जिले मे हर साल होने वाले पुनर्भरण सर्वेक्षण की कोई जानकारी दैनिक समाचार पत्रों या मीडिया को खनिज विभाग अथवा सूचना विभाग द्वारा नहीं दी जाती है। बतलाते चले कि मौरम खंड शुरू होने से पहले वर्षाकाल की बाधित अवधि के तुरंत बाद और हर साल खनन सत्र खत्म होते (खंड मे जुलाई से खनन रुकने के बाद) ही पुनर्भरण सर्वेक्षण किया जाता है। ताकि सरकार व प्रशासन को यह जानकारी हो सके कि उक्त मौरम खंडों में कितनी मात्रा मे खनिज उत्खनन हुआ था और कितना वापस जमा (पुनर्भरण) हुआ है। किंतु न तो इसकी प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है और न ही कोई डेटा सरकारी वेबसाइट, पब्लिक डोमेन पर सार्वजनिक होता है। वहीं पांच साल बाद डीएसआर मे दो मानसून सत्र गुजरने के बाद ही सही पुनर्भरण रिपोर्ट तैयार होती है। काबिलेगौर है कि एनजीटी ने आगामी 19 मार्च याचिका संख्या 614/2025 की डेट फिर से सुनवाई को लगाई है। उधर यूपी की सरहद से लगे मध्यप्रदेश के जिला छतरपुर के रामपुर घाट, चंदला विधानसभा के बारीखेड़ा तक लिफ्टर से अवैध खनन किया जा रहा है। सवाल यह है कि जो अधिकारी अवैध खनन मे संलिप्त होते है वे ज्वाइंट कमेटी के साथ रहकर निष्पक्ष जांच होने का दावा कैसे कर सकतें है।