विकास की योजना मे भ्रष्टाचार की कालिख.... बांदा मे सीएससी, पीएससी को आवंटित 26 लाख रुपया और स्वच्छ भारत मिशन मे 17.85 करोड़ की सेंधमारी...

काबिलेगौर है कि इस कड़ी मे उप निदेशक पंचायत परवेज आलम खां ने बीते गुरुवार को एसपी बांदा के समक्ष एक तहरीर देकर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय द्वारा आईडी और पासवर्ड का...

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Apr 10, 2026 - 14:27
Apr 10, 2026 - 14:38
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विकास की योजना मे भ्रष्टाचार की कालिख.... बांदा मे सीएससी, पीएससी को आवंटित 26 लाख रुपया और स्वच्छ भारत मिशन मे 17.85 करोड़ की सेंधमारी...

आशीष सागर दीक्षित

"जांच मे खुली भ्रष्टाचार की पोलपट्टी तो विकास भवन मे बैठे डीपीआरओ ने डीडी पंचायत (उप निदेशक पंचायत) परवेज आलम खां को घेरने के लिए विभागीय महिलाओं को औजार बना लिया है। सरकारी योजनाओं मे इस वित्तीय गड़बड़ी को लेकर सख्त रुख किए उप निदेशक पंचायत ने मामले मे एसपी बांदा को तहरीर देकर कार्यवाही की मांग उठाई है। उधर डीपीआरओ विभाग मे कार्यरत महिलाओं से अभद्रता के आरोप की शिकायत भी एसपी बांदा ने अपर एसपी शिवराज सिंह को दी है।" 

बांदा। विकास भवन बांदा मे राष्ट्रीय आजीविका मिशन की पूर्व में हुई धांधली और लिखापढ़ी में महज 87 लाख लेकिन 3 करोड़ के गबन होने के बाद दर्ज की गई नगर कोतवाली  मे एफआईआर पर आज दो साल बाद भी भले ही दोषियों के खिलाफ सरकार एवं प्रशासनिक अफसरों को कुछ न हासिल हुआ हो। क्योंकि पुलिस द्वारा आईओ बने नगर कोतवाल साहब इस बावत दर्ज किए गए मुकदमा  दिनांक 30 अगस्त 2024 अपराध संख्या 0700/24 मे विवेचना ही बख्तरबंद के अंदरखाने मे दबी है। वहीं एनआरएलएम के भ्रष्टाचारी आज तक मौज कर रहें है। लेकिन एक बार पुनः  पंचायती राज विभाग के मातहत सरकारी विभागों का वित्तीय भ्रष्टाचार मुंह उठाए सामने आ रहा है। काबिलेगौर है कि इस कड़ी मे उप निदेशक पंचायत परवेज आलम खां ने बीते गुरुवार को एसपी बांदा के समक्ष एक तहरीर देकर जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय द्वारा आईडी और पासवर्ड का अवैध प्रयोग करने से लेकर स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत मॉडल ग्राम पंचायतों को आवंटित साल 2023 मे 28.52 करोड़ रुपए से संबंधित है। विभागीय सत्यापन जांच के दौरान मॉडल ग्राम पंचायत द्वारा सिर्फ 10.67 करोड़ रुपए का हिसाब किताब, बिल भुगतान विवरण ही उपल्ब्ध है। जबकि आवंटित बजट का 17.85 करोड़ रुपया कहां हजम हो गया इसका लेखाजोखा किसी के पास नहीं मिल रहा है। डीडी पंचायत परवेज आलम खां ने यह भी आरोप लगाएं है कि सामुदायिक सेवा केंद्र और प्रखंड स्तरीय केंद्र निर्माण के लिए दिए गए 26 लाख रुपए भी पंचायतों को हस्तांतरित किए गए थे। किन्तु जब इस विषयक भी सवाल जवाब और पूछताछ की गई तो कोई सही उत्तर नहीं मिलता है।

बतलाते चलें कि डीडी पंचायत परवेज आलम खां ने कहा कि चित्रकूट मंडल आयुक्त के आदेशों के बावजूद भी इस बड़ी धनराशि का विवरण प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। सरकारी धन पर कुंडली मारकर बैठे भ्रष्टाचार  के सरकारी धरतीपुत्र मसलन डीपीआरओ बांदा कार्यालय ने उच्च अधिकारियों के निर्देश और आदेश को ताक पर रखकर सरकारी बजट का बंदरबांट किया है। बड़ी बात है कि इस वित्तीय गड़बड़ी का हिसाब किताब और आला अफसरों के आदेश को अनदेखा करने वाले जिला पंचायत राज अधिकारी का वेतन डीडी पंचायत परवेज आलम खां ने अग्रिम आदेशों तक रोक दिया है। इससे बौखलाए तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी ने प्रभारी डीपीआरओ राजेंद्र कुमार को मोहरा बनाकर कार्यालय की महिलाओं से डीडी पंचायत परवेज आलम खां पर आरोप लगवाया कि डीडी पंचायत द्वारा कार्मिक महिलाओं को दफ्तर के बाद भी आवास पर फाइल मे दस्तख़त के बहाने बुलाया जाता है। विरोध करने पर अधिकारी अभद्रता करते है। गौरतलब है महिलाओं के इस आरोप की जांच एसपी बांदा ने अपर एसपी शिवराज सिंह को सौंप दी है। उन्होंने डीडी पंचायत से जवाब तलब किया है। वहीं गुरुवार को डीडी पंचायत परवेज आलम खां ने भी शासकीय बजट का जिला पंचायत राज अधिकारी की मिलीभगत से कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा बड़े स्तर पर वित्तीय गबन का साक्ष्य देते हुए तहरीर देकर कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने महिलाओं के आरोप को क्रिया की प्रतिक्रिया अर्थात दुराग्रह पूर्ण कृत्य बताया है। उल्लेखनीय है जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में दशकों से सम्पूर्ण स्वक्षता अभियान का बजट ठिकाने लगाया जाता है। यहां तक कि आउट सोर्सिंग भर्ती मे भी विभागीय कमीशन के तथ्यों को सूत्रधार उजागर करते रहें है।  इस मामले में योजना के कॉर्डिनेटर मनोज पर भी कई बार गंभीर आरोप लगे है। लेकिन इस बार मामला सीधा डीपीआरओ से जुड़ गया है। देखना यह होगा कि भ्रष्टाचार की इस लुकाछिपी में डीडी पंचायत परवेज आलम खां कितने दिन तक टिके रहते है।

पूर्व मे भी एनआरएलएम के भ्रष्टाचार पर कुछ नहीं हुआ

 बांदा के विकास भवन में ही एक अन्य राष्ट्रीय आजीविका मिशन कार्यालय भी लंबे वक्त से वित्तीय अनियमितता का केंद्र बना है। इस पर साल 2024 में नगर कोतवाली पर मुकदमा भी दर्ज किया गया लेकिन कागजी रूप से 87 लाख पर हकीकत में करीब 3 करोड़ रुपए के घोटाले पर आज तक अपराध संख्या 0700/2024 मे किसी प्रकार की रिकवरी एवं दाण्डिक कार्यवाही नहीं की गई है। इसमें भी संलिप्त जिला मिशन प्रबंधक क्रमशः धर्मेंद्र जायसवाल, राकेश सोनकर, शालनी जैन और ब्लाक मिशन प्रबंधक रही आकांक्षा कुशवाहा का नाम सुर्ख़ियों में रहा है। शिकायत कर्ता बृजेश अग्निहोत्री ब्लाक मिशन प्रबंधक विकासखंड बड़ोखर खुर्द ने दिनांक 15 अप्रैल 2024 को पत्र लिखकर उपायुक्त एनआरएलएम से समूह की महिलाओं के खाते में लगभग 3 करोड़ रुपए तत्कालीन ब्लाक मिशन प्रबंधक आकांक्षा कुशवाहा द्वारा कूटनीतिक तरीके से डालकर वापस निकासी और जिला मिशन प्रबन्धक की सांठगांठ से हड़पने के पुख्ता आरोप लगाए थे। तत्कालीन सीडीओ वेद प्रकाश मौर्या के हस्तक्षेप से प्रारंभ की गई जांच में लीपापोती करते हुए ज्यादातर समूह की महिला बचा ली गई। वहीं मुख्य अभियुक्त आकांक्षा कुशवाहा ने नौकरी छोड़ दी थी। जबकि तीन आउट सोर्सिंग से भर्ती हुए जिला मिशन प्रबंधक आज तक मलाई खा रहें है। विडम्बना देखिए इस योजना की खिलाड़ी रही आकांक्षा कुशवाहा पर जिला उद्यान विभाग अधिकारी केशवराम चौधरी बांदा ने भी बाद में डीआरपी सहित तीन लोगों क्रमशः महुआ विकासखंड के ग्राम ख़मौरा निवासी आकांक्षा कुशवाहा (अंकिता इंटरप्राइजेज),जिला रिसोर्स पर्सन शिवम द्विवेदी, तिंदवारा के संदीप कुमार के विरुद्ध हाल ही में अक्टूबर 2025 को मुकदमा लिखा गया था। इस मामले में भी वर्तमान नगर कोतवाल बलराम सिंह ने क्या किया किसी को कुछ जानकारी सार्वजनिक रूप से नहीं है। यह पूरा मामला स्वरोजगार हेतु 4.50 लाख रुपए इंडियन बैंक के ऋण से जुड़ा था।

सरकारी विभागों में अक्सर हो रहे करोड़ों के भ्रष्टाचार पर माकूल कार्यवाही नहीं होती है। इसलिए भ्रष्टाचार करने वाले खुद को राबिनहुड मानकर ऐश करते रहते है। अब डीपीआरओ से जुड़े मामले पर डीडी पंचायत कितनी जमीनी लड़ाई लड़ पाएंगे यह देखने वाली बात होगी।