सूचना बोर्ड पर नाम नहीं और न खोली समय सीमा, ऐसा लगता है सांडी मौरम खंड एक का है लाइफ टाइम बीमा...?
ग्रामीण एवं इस खंड करोबार से जुड़े गुप्त सूत्रों की मानें तो सांडी खादर मौरम खंड एक में खनन के लिए 6 माह का पट्टा हुआ है। यह केन कैनाल के समीप है। वहीं पूर्वांचल के बाहुबली नेता व...
आशीष सागर दीक्षित
"पूर्वांचल के गन,धन और जय बराबर धनंजय"....!!!?
यूपी हो या मध्यप्रदेश खनिज उत्खनन के कारोबार से जुड़े प्रत्येक लाल मौरम या ग्रेनाइट उत्खनन पट्टेधारक को अपने सूचना बोर्ड या खदान मार्ग लगाए गए कंपनी के बोर्ड पर फर्म अथवा कंपनी का नाम, खदान संचालक का नाम एवं खदान संचालन की समयावधि/ समय सीमा लिखना अनिवार्य होता है।
बांदा मे अधिकांश मौरम पट्टेधारक खाली फर्म का नाम लिखता है लेकिन संचालन कर्ता और समयावधि गायब कर देता है। किन्तु पैलानी के ग्राम सांडी खादर मौरम खंड एक का यह बोर्ड तो कमाल ही किए है जिसमें न तो फर्म/ कम्पनी का नाम अंकित (लिखा) किया गया है। और न ही फर्म प्रोपराइटर का नाम है, न ही खदान की समयावधि खोली गई है।
ग्रामीण एवं इस खंड करोबार से जुड़े गुप्त सूत्रों की मानें तो सांडी खादर मौरम खंड एक में खनन के लिए 6 माह का पट्टा हुआ है। यह केन कैनाल के समीप है। वहीं पूर्वांचल के बाहुबली नेता व पूर्व सांसद धनंजय सिंह की परोक्ष रूप से इंट्री है। माइनिंग कंपनी अन्य व्यक्ति के नाम है। जैसा अमूमन रसूखदार ठेकेदार लोग करते है। खंड में इनके भांजे की हनक रहती है। वहीं खदान की रॉयल्टी किसी आरएस माइनिंग, पार्टनर चंद्रशेखर अग्रवाल के नाम से कट रही है।
उक्त मौरम खंड एक सांडी खादर ने आते ही एक क्षेत्रीय पत्रकार महेश द्विवेदी सहित खपटिंहा कला के राहुल सिंह समेत सात नामजद और चार अज्ञात लोगों पर 25 लाख की रंगदारी का मुकदमा लिखाया है। वहीं खदान में एनजीटी और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश की धज्जियां उड़ाती प्रतिबंधित अर्थ मूविंग मशीनों का जलजला है। पूर्वाचल के सफेदपोश और अन्यत्र खदानों के सिंघम आजकल बांदा के ग्राम सांडी खंड एक में गरजने लगे है।
बांदा। उत्तरप्रदेश के बांदा मे पैलानी तहसील अंतर्गत हाल ही में बीते 9 मार्च को प्रारंभ की गई ग्राम सांडी खादर की मौरम खदान खण्ड संख्या 1 के हाल शुरुआत से अलहदा है। खदान शुरू की गई तो ग्रामीण लोगों का बाहरी बालाओं ने मनोरंजन किया। नवरात्रि पड़ रही थी तो कन्या भोज भी आयोजित हुआ। खदान प्रारंभ होने के दिन लगभग आधा सैकड़ा लक्जरी गाड़ियों का काफिला ग्राम सांडी में कोलाहल कर रहा था। अंदरखाने की खबर यह है कि ग्राम सांडी के इस मौरम खंड एक से परोक्ष रूप से या यूं कहिए पर्दे के पीछे से पूर्वांचल के बाहुबली और पूर्व सांसद धनंजय सिंह का रिमोट कंट्रोल है। पूर्वांचल की राजनीति का सफेदपोश और कद्दावर नेता अपराध की बुलंदी से अब पिछले कुछ वर्षों लाल मौरम के कारोबार में शामिल है। बतलाते चले कि कुछ माह पूर्व अचूक संघर्ष साप्ताहिक एवं डिजीटल न्यूज ने अमित मौर्या के हवाले से सोनभद्र और मिर्जापुर की पट्टी पर इनके रुतबे से मौरम खनन की सिलसिले वार इबारत जनता को दिखाई थी। कुछ साल पहले बीबीसी हिन्दी ने बाहुबली धनंजय सिंह पर लीड स्टोरी करते हुए पंच लाइन थी "गन,धन,जय का नाम धनंजय" !
मौरम खंड एक सांडी के सूचना बोर्ड पर कारनामें
उत्तरप्रदेश सरकार एवं खनिज निदेशालय के स्पष्ट निर्देश है कि खनिज कारोबार से जुड़े पट्टेधारकों को खदान मार्ग और धर्मकांटे पर सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है। जिसमें फर्म का नाम, संचालक लीज होल्डर का नाम और खनन की मियाद अर्थात समय सीमा लिखना अनिवार्यता से सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस बाबत आदेश दिए हैं कि गाहेबगाहे यह विभाग खनन स्थल पर औचक निरीक्षण करके पर्यावरण जल एवं वायु एनओसी का जमीनी मूल्यांकन करेगा। साथ ही वनविभाग भी अपने वनभूमि से परिवहन निकासी और 100 मीटर की दूरी तक खनन को प्रतिबिंबित करेगा। लेकिन एनजीटी सहित तमाम आदेशों को धता बतलाते हुए ग्राम सांडी के मौरम खंड एक में सूचना बोर्ड पर खदान चालू है के फरमान के साथ महज दो मोबाइल नंबर अंकित किए गए है। यह खदान कौन चलाता है, फर्म मालिक या प्रोपराइटर कौन है, इसकी मियाद कब तक है? ऐसा कुछ भी खबर लिखे जाने तक प्राप्त सूचना बोर्ड मुताबिक नदारद है।
मौरम खंड की सफेदपोशी ने आते ही दिखाई हनक
ग्राम सांडी मौरम खंड एक के सूचना बोर्ड अनुसार गुमशुदा संचालक ने खदान की शुरुआत करते ही माहौल टाइट करने को सात नामजद और चार अज्ञात लोगों पर 25 लाख की रंगदारी का मुकदमा लिखवा दिया। ताकि गांव से लेकर मीडिया तक एक भी आवाज इनके कारनामों पर बुलंद न हो सके। वहीं बांदा के मौरम खंडों में इस सुनियोजित माफिया स्टंट को प्रशासन भी बखूबी साथ देता है। यह अलग बात है फर्जी मुकदमों की जालसाजी और कूटनीति का तिकड़म माननीय न्यायालय मे औंधे मुंह गिर जाता है। मुकदमा झेल रहे इन लोगों में एक क्षेत्रीय पत्रकार महेश द्विवेदी भी शामिल है। गौरतलब है कि इस मौरम खंड में भी अन्य खदानों की तर्ज पर बेख़ौफ़ अवैध खनन चलने लगा है। लीज की आड में प्रतिबंधित पोकलैंड नदी की जलधारा में मौरम निकासी कर रहीं है। वहीं खदान पर जाने वालों मसलन किसानों और मिडिया पर अघोषित कर्फ्यू लगा हुआ है। ऐसा लगता है कि केन नदी में खनन पट्टे के साथ इन्होंने पूरे इलाके को खामोश रखने का अभियान छेड़ रखा है। यूपी में ठाकुरबाड़ी की सरकार मे मौरम खनन के सिंघम जनता के हिस्से का पानी, केन नदी की जैवविविधता और किसानों की आजीविका और सीधी मार लीगल लीज से अवैध खनन करके करते नजर आते है। डीएम बांदा श्रीमती जे. रिभा द्वारा गठित खनिज टास्क फोर्स और खान अधिकारी राज रंजन की कार्यवाही निगरानी के साथ क्या कभी इनमें होगी यह देखने वाली बात होगी। वहीं सूचना बोर्ड की स्पष्ट जानकारी कैसे दुरुस्त होगी यह पैलानी तहसील के एसडीएम साहब को भी गौर करना चाहिए।