"राष्ट्रवादियों ने की कर चोरी, खनन, मेडिकल, रियल स्टेट, एविएशन और मैन पावर से मुनाफाखोरी..."
आयकर कानपुर और लखनऊ की जांच टीम ने बांदा के जिन धन कुबेरों की नब्ज टटोली है उन्होंने बांदा के होते हुए यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश तक सिंडिकेट और ग्रुप बनाकर सफेद, काले धन का निवेश कारोबार मे किया है..
"यूपी के बांदा मे बीते दो दिन से आयकर की टीम स्थानीय धन कुबेरों और रसूखदार लोगों के दस्तावेज खंगाल रही है। लखनऊ से बांदा पधारी आयकर की इस टीम ने खनन, रियल स्टेट,मेडिकल,एविएशन और सरकारी दफ्तरों मे मानव संसाधन आपूर्ति करने वाले सफेदपोश लोगों के घरों की तलाशी ली है।"
बांदा। उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार,भूटान तक फैले ग्रेनाइट,मौरम खनन कारोबार, रियल स्टेट मे निवेश, मेडिकल व्यवसाय के मार्फत निजी लक्जरी अस्पताल, सरकारी दफ्तरों मे मानव संसाधन आपूर्ति,प्रापर्टी डीलर के साथ एविएशन फील्ड मे करोड़ों रुपया खपाए मुट्ठीभर कद्दावर लोगों को आयकर की जांच एजेंसी ने अपने शिकंजे मे लिया है। इन सफेदपोश वीआईपी लोगों मे बांदा के सीरजध्वज सिंह, अज्ञात गुप्ता, शिवशरण सिंह, दिलीप सिंह कालू कुआं, दिलीप गुप्ता (पन्ना, भोपाल), बिजली कारोबार से जुड़े शशांक शेखर शामिल है।
सिंडिकेट और ग्रुप बनाकर करतें है कारोबार...
आयकर कानपुर और लखनऊ की जांच टीम ने बांदा के जिन धन कुबेरों की नब्ज टटोली है उन्होंने बांदा के होते हुए यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश तक सिंडिकेट और ग्रुप बनाकर सफेद, काले धन का निवेश कारोबार मे किया है। जिसमें पन्ना जिले रहवासी दिलीप गुप्ता (डीजी ग्रुप) मूलतः ग्रेनाइट खनन और मेडिकल का काम करते है। इन पर भोपाल मे भी आयकर की रेड / छापेमारी हुई है। यह दिलीप गुप्ता विगत एक साल से जांच का सामना कर रहें है। वहीं बांदा आवास विकास बी ब्लाक निवासी अज्ञात गुप्ता जिनका इतिहास कभी अदने से मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने का था। आज बांदा के आवास विकास बी ब्लाक मे ही इनके पांच भूखंड है। जिसमें एक निजी नर्सिंग होम अवनी परिधि प्राइवेट लिमिटेड शामिल है। अज्ञात गुप्ता ने समाजवादी सरकार मे मुख्य सचिव रहे आईएएस आलोक रंजन को साधकर फर्जी कम्पनियों का खेल शुरू किया। वहीं इन्होंने आवास विकास बी ब्लाक स्थित अपने नर्सिंग होम के पास ही ओपन स्पेस पार्क को फर्जीवाड़ा करके रजिस्ट्री करा लिया था। यह मुद्दा आज भी जिंदा है। वहीं आधा दर्जन निजी कम्पनियों को बनाकर अज्ञात गुप्ता ने सरकारी संस्थाओं मे मानव संसाधन आपूर्ति करने के साथ निजी नर्सिंग होम का संचालन, रियल स्टेट मे निवेश और टेंडर लेकर सरकारी बड़े काम, भूखंड खरीदना शुरू किया था। आज आयकर की जांच टीम पिछले दो दिन से जिन धरतीपुत्रों की जन्म कुंडली देख रही है उनके साथ भी अज्ञात गुप्ता के नेटवर्क और व्यावसायिक हिस्सेदारी है।
पन्ना जिले के बरौली गांव निवासी एवं डीजी ग्रुप के ऑनर दिलीप गुप्ता भी मेडिकल काम करते है। इन्होने करोड़ों रुपए की परिसंपत्ति अर्जित कर रखी है। लेकिन जांच ठीकठाक हो तो अज्ञात गुप्ता इन सबके बाजीगर निकल सकतें है। बांदा, लखनऊ, नोएडा, दिल्ली, मुम्बई और अन्य शहरों तक बेशकीमती भूखंड, प्रापर्टी सेक्टर मे निवेश अज्ञात गुप्ता ने किया है। कभी बांदा के अशोक लाट तिराहे पर पीडी फोटो कापी से जुड़े अज्ञात की आज अनुमानित दौलत को ज्ञात करना टेढ़ी खीर है। यह रहस्यमय प्रगति इतनी जल्दी कैसे संभव हो सकी यह भी सीबीआई और ईडी जांच का हिस्सा होना चाहिए। अलबत्ता ऐसा मुमकिन होना अज्ञात जैसे खिलाड़ी के खिलाफ मुश्किल दिखता है। सरकारी विभागों से लेकर सत्ता के गलियारों तक अपना बंदोबस्त और लाइजनिंग करना अज्ञात गुप्ता के लिए मामूली कारनामे है। वहीं बांदा के कालू कुआं चौराहे निवासी रिलायंस पेट्रोलपंप के मालिक ग्राम महोखर से मूल रिश्ता रखने वाले दिलीप सिंह मूलतः बुंदेलखंड मे पहाड़ खनन और स्टोन क्रेशर का कारोबार दो दशक से करते आ रहें है। महोबा, बांदा मे इनके ग्रेनाइट खनन पट्टे, स्टोन क्रेशर रहें है। इनके पास पुश्तैनी जमीन भी पहले से थी। वहीं मौरम खनन मे भी इन्होंने हाथ आजमाए हैं। कहते है बुंदेलखंड में लाल मौरम और पहाड़ के पेशे में बेशुमार दौलत बरसती है। साल 2019 में बसपा से लोकसभा चुनाव लड़ चुके दिलीप सिंह अब पर्दे के पीछे से भारतीय जनता पार्टी के सिपाही है। इनके परिवारिक राहुल सिंह गुड्डू तो बाकायदा भाजपा से चुनावी ताल ठोकने के विगत दो बार के विधानसभा चुनाव से तैयार बंदे है। इन्होने बांदा आसपास वाल पेंटिंग भी अपने चुनावी शंखनाद के मद्देनजर करा रखी है। राहुल सिंह गुड्डू बांदा की अमलोर मौरम खंड 7 मे कभी गाजियाबाद निवासी व खनन माफिया और गैंगस्टर विपुल त्यागी के साथ दूसरे सत्र मे पार्टनर हुआ करते थे। इससे पूर्व भी यह ग्रेनाइट खनन से जुड़े रहे है।
कालू कुआं चौराहे में राजा साहब की कोठी का भोग विलास और रुतबा तब और ज्यादा जगजाहिर हुआ जब हाल ही मे दिलीप सिंह ने अपनी बेटी का विवाह राजस्थान के जैसलमेर में किया था। एक माह पूर्व जैसलमेर के पांच सितारा होटल सूर्यगढ़ पैलेस से सम्पन्न हुए इस भव्य विवाह उत्सव में रूपयों की बरसात ने रेगिस्तान को भी चकाचौंध कर दिया था। सूत्रधार कहते है कि करोड़ों रुपयों की यह शादी किसी महाराज के राजशाही जलवे से कमतर नहीं थी। चुनिंदा बारातियों और मेहमानों से सजी इस बारात में बांदा, हमीरपुर के बारातियों को कानपुर, लखनऊ से हवाई जहाज द्वारा आने जाने की सुविधा दी गई थी। वहीं जैसलमेर मे धूमधाम से वैवाहिक जलसे को फिल्मी हस्तियों मसलन मलाइका अरोड़ा, गायक विशाल डडलानी और कपिल शर्मा लाफ्टर शोज़ के कलाकारों, लकदक आर्केस्ट्रा से गुलजार किया गया था। सूर्यगढ़ पैलेस की यह धमक बांदा के आम आदमी तक सोशल मीडिया के जरिए पहुंची थी।
वहीं दिलीप सिंह के लिए निजी सूत्र कहते है कि कोरोना काल में उन्होंने अच्छी आर्थिक मदद मुख्यमंत्री कोष में सीएम योगी को दिया था। यह खबर मीडिया की चर्चा का हिस्सा बनी थी। आयकर टीम बांदा के जिन सीरजध्वज सिंह और उनके मुनीम रहे शिवशरण सिंह की बाट जोह रही है उनकी हैसियत भी आज अरबों मे है। सीरजध्वज सिंह बसपा सरकार से बांदा के कद्दावर मौरम कारोबारी रहें है। कहते है तब लाल मौरम खदान से रुपया बोरों मे भरकर आता था। इतना कि सीरजध्वज सिंह के करिंदा,ड्राइवर, मुनीम और कारखास तक आज भूटान के कारोबार में दस्तक दिए है। शिवशरण सिंह जो कभी सीरजध्वज के मुनीम रहे आज अरबपति आसामी है। इनके रियल स्टेट, खनन, प्रापर्टी डीलिंग, एविएशन सेक्टर और अन्य फील्ड में बड़े निवेश है। सीरजध्वज सिंह पुराने जमींदार परिवार से है। आयकर की जांच टीम ने सिविल लाइन निवासी स्टोन क्रेशर और पहाड़ खनन कारोबारी सोमेश भारद्वाज के दफ्तरों में भी जांच पड़ताल की है। दिलीप सिंह के जगदम्बा स्टोन क्रेशर और सोमेश के श्रिया स्टोन क्रेशर प्लांट में आयकर की टीम ने दस्तावेज देखें है। वहीं इन सबके साथ नए खिलाड़ी के रूप में जुड़े शशांक शेखर को भी आयकर टीम ने शिकंजे में लिया है। उक्त सभी के घरों, दफ्तरों तक पूरी चाक चौबंद व्यवस्था से आयकर की टीम दो दिन से जांच कर रही है। उनके साथ पुलिसिया सुरक्षा भी मौजूद रही है।
करोड़ों के जेवर,नकदी और परिसंपत्तियों के दस्तावेज मिले...
आयकर की टीम ने मीडिया ब्रीफिंग नहीं की है। लेकिन उड़ती हुई जानकारी मुताबिक दिलीप सिंह की सत्रह करोड़ की प्रॉपर्टी, साढ़े सात करोड़ के जेवर, भारी नकदी और कई नामी बेनामी संपतियों के दस्तावेज आयकर की टीम को हाथ लगे है। जिन्हें बांदा सहित दूसरे बड़े शहरों में खनन, रियल स्टेट, मेडिकल, एविएशन के कारोबार से बनाया गया है। देखना होगा कि आयकर की यह जांच किस करवट बैठती है क्योंकि सारी हस्तियों के संपर्क सत्ता और पावरफुल लोगों से स्थापित है। यही नहीं यह सभी सियासत के माननीयों के भी खास रहते है। उनके काले धन भी इनके कारोबार में घुलमिल जाते है। बांदा के कुछ माननीयों ने झांसी, मथुरा, लखनऊ, गाजियाबाद, अमरोहा, बाराबंकी, पहाड़ी राज्यों तक प्रापर्टी बना रखी है।