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सियासत

2022 की विधानसभा चुनाव से पहले क्या पूर्वांचल राज्य बना सकती है बीजेपी ?

पिछले कुछ दिनों से योगी आदित्य नाथ और दिल्ली बीजेपी  शीर्ष नेतृत्व के बीच तनातनी का बड़ा कारण है उत्तर प्रदेश को 2 राज्यों में विभक्त करना. आज कोविड-19 और किसान विल के कारण बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को मालूम हो गया है की आगामी विधानसभा यदि योगी के नेतृत्व में लड़ा जायेगा तो निश्चित है की यू.पी से बीजेपी का सफाया होगा. यह बीजेपी ने ग्राउंड सर्वे करके देख लिया है. आईये देखते है क्या है इसके पीछे सियासत.

पूर्वांचल राज्य बनाने की पीछे सियासत

जिस विभाजन की बात बीजेपी कर रही है उसकी कमेस्ट्री यह है की पूर्वांचल में कुल 23 से 25 जिले और 125 विधानसभा सीटें हो सकती हैं. पिछला रिकार्ड यदि देखा जाय तो पूर्वांचल से जीतने वाला ही उत्तर प्रदेश की सत्ता परकाबिज होता है. दुसरे शब्दों में यह कहा जाता है की उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता पूर्वांचल से ही होकर जाता है.जिस पार्टी के पास पूर्वांचल से अधिक सीटें अभी तक आई हैं वही दल, यहां की सत्ता पर काबिज होता है.पिछले 27 साल के  रिकार्ड का मूल्यांकन करें तो पूर्वांचल का मतदाता कभी किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहा. 2017 में 27 साल बाद भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला जरुर लेकिन 10 जिलों में वह फिर भी कमजोर थी.

गौरतलब है की प्रचंड राममंदिर लहर के बीच 1991 में जब भाजपा पहली बार उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई तो इसको कुल 221 सीट मिली थी. चूंकि उस समय परिसीमन नहीं हुआ था तो पूर्वांचल की 28 जिलों में कुल 152 सिट थी जिसमें सिर्फ 82 सीट पर भगवा लहराया था. इसके बाद लगातार जब -जब चुनाव हुए भाजपा का प्रदर्शन कमजोर होता गया. वर्ष 1991 के बाद 2017 में भाजपा को पूर्वांचल की 28 जिलों की 164 विधानसभा सीट में से 115 सीट मिली .जिसको अभी तक  भाजपा का पूर्वांचल से सर्वाधिक स्कोर का रिकॉर्ड कहा जायेगा. अब 23 या  25 जिलों में से सिर्फ 10 जिलों में भाजपा को कड़ी मेहनत करने की की जरुरत है. जबकि समाजवादी पार्टी का दबदबा इन 10 जिलों में बना हुआ है. पूर्वांचल के कुछ जिले ऐसे हैं जहां 2017 में भाजपा ने बढ़त बनाई थी, लेकिन 2022 के होने वाले विधान सभा चुनावों में यह बढ़त बना पाना बीजेपी को आशंका है.

पूर्वांचल में धर्म और जाति का बड़ा फैक्टर हर चुनाओं में हावी रहता है और बीजेपी का बेस मतदाता का मत विधान सभा वाईज कम है जिसके कारण सपा की बेस वोट कही जाने वाली मुस्लिम-यादव का लगभग हर जिले के हर विधानसभा में 60 हजार से लेकर 1 लाख वोट तक मौजूद है.यही कारण है की सपा यहाँ मजबूत दल के रूप में बनी रहती है. और ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम समीकरण के बहाने बसपा और कभी मुस्लिम-यादव समीकरण के बहाने सपा ने यहां कई बार बहुमत प्राप्त किया. इसी तरह जब हिंदुत्व का भाव भाजपा ने जगाया तब भाजपा को बहुमत मिला.

पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच तनातनी की अटकलें चल रही हैं. सियासी हलकों में इसका कारण उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन और कैबिनेट विस्तार बताया जा रहा था लेकिन इसके पीछे असल कहानी सामने आ रही है यू.पी.का विभाजन. सूत्रों के अनुसार सी.एम.योगी प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को समाधान नमक पुस्तक भेट कर रहें हैं.असल में यही समाधान है सत्ता की कमेस्ट्री को ठीक करना.

यदि दिल्ली बीजेपी और सी.एम योगी ऐसा कर पाने में सफल हो जाते हैं तो पूर्वांचल राज्य बनेगा और सी.एम.योगी का जनपद गोरखपुर भी इस नए राज्य में होगा.चुकी महंत योगी 1998 से 2017 तक पांच बार गोरखपुर से लोकसभा सांसद रहे. वर्तमान में योगी, गोरक्षपीठ के महंत भी हैं.इसलिए इस पर इनका दबदबा होगा ऐसा अनुमान है .

सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल में गोरखपुर जनपद समेत कुल 23 से 25 जिले शामिल हो सकते हैं और कुल विधान सभाएं इसमें 125 होंगी.गौरतलब है कि अलग पूर्वांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश की मांग लंबे समय से चल रही है. हालांकि, पहले योगी सरकार ने पूर्वांचल के विकास के लिए 28 जिलों का चयन किया भी था.

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