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चेतना

कुछ नमूना देखिये ! कैसे सजीव तरीके से ब्राह्मण आपको ठग रहा है ?

हिन्दू धर्म रूपी गाड़ी का ड्राईवर ब्राह्मण है.जिस दिशा में गाड़ी ले जाना चाहे वह ले जा सकता है क्योकि स्टेयरिंग उसी के हाथ में है. अब उसने समझ लिया की ये जो कमेरा वर्ग (एस.सी.,एस.टी.और ओ.बी.सी.) है इसमें धर्म रूपी अफीम की लत डालो. जब इसके ब्लड में धर्म रूपी नशा चढ़ जायेगा तो पूरा जीवन यह हमें तथा हमारे पीढ़ियों को कमा कर खिलाता रहेगा. तब इसने बड़ी चालाकी के साथ थोड़ा-थोड़ा नशा देना शुरू किया. आज आलम यह है की कई पीढ़ियों से बहुजन की कमाई का कुछ अंश प्रतिवर्ष लेता रहता है.और धीरे-धीरे षढ़यंत्रों के तहद योजनाबद्ध तरीके से झूठ की खेती हमारे बीच करता है उसको पता भी रहता है कि वह झूठ ही बो रहा है किन्तु 85% समाज को नहीं पता चलता कि ये ब्राह्मण सदियों से हमारे दिमाग में झूठे भगवान, देवी-देवता,पुनर्जन्म, स्वर्ग-नर्क,भूत-प्रेत ,भाग्य-भगवान आदि का भय और लालच योजनाबद्ध तरीके से प्रवेश करा रहा है. चुकी यह समाज अपनी अशिक्षा व अज्ञानता के कारण ब्राह्मणों के झूठ को समझ नहीं पाते. वर्तमान स्थिति यह है की  बहुजन समाज की और इसी अज्ञानता के दम पर ब्राह्मणों के झूठ की खेती आज तक लहलहा रही है और स्वयं दिन – प्रतिदिन मालामाल हो रहें हैं और वहीं 85 % जनता को कंगाल कर रहें है इतना ही नहीं इसी झूठ की खेती के बदौलत आज ये ब्राह्मण भारत के शासक बने बैठे हैं और शोषित,शासित ,पीड़ित,अज्ञानी,अशिक्षित व अधिकार वंचित  स्वैच्छिक गुलाम, बहुजन जनता इनकी प्रजा बन बैठी है.और संख्या बल में ज्यादा फिर भी गुलाम हैं.आईये कुछ नमूनों को देखते हैं ---

नमूना -1-ब्राह्मण को पता है की मंदिर की उस मूर्ति में जिसमें उसने प्राण प्रतिष्ठा के नाम पर झूठ मूठ का छू मंतर किया हुआ है, कोई शक्ति नहीं है वह एक साधारण पत्थर से अधिक कुछ नहीं है तभी तो वो घर आते समय हर बार उस मन्दिर में ताला लगाकर आता है क्योंकि उसे भगवान की उस मूर्ति पर विश्वास ही नही है कि ये मूर्ति  मन्दिर में रखी बस्तुओं को चोरों से बचा लेगी. लेकिन उसके द्वारा अशिक्षित व अज्ञानी लोग के दिमाग में उसने यह झूठ बिठा दिया है कि मंदिर की घंटी बजाओगे, उसमें रखी मूर्ति के आगे नाक रगड़ोगे, पूजा अर्चना करके चढ़ावा चढ़ाओगे, तो सारे दुख दूर हो जायेंगे तथा पूरे परिवार का कल्याण हो जायेगा. ब्राह्मणों के इस झूठ को सच मानकर अपनी मासूम जनता अपनी मेहनत की कमाई, मंदिरों की दानपेटियों में लगातार डाल रहे हैं. जिससे यह चालक ब्राह्मण सदा समृद्ध होता चला आ रहा है.

 

नमूना -2-ब्राह्मण को पता है कि जो आदमी मर गया वह न किसी की झोली भर सकता है न खाली कर सकता है लेकिन ब्राह्मणों के द्वारा फैलायेगये झूठ के वशीभूत होकर करोड़ों बहुजन परिवार साईं बाबा और अन्य न जाने कितने हजारों बाबाओं की समाधियों और मूर्तियों पर चढ़ावा चढ़ा कर अपनी झोली भरवाने एवं बिगड़ी बनवाने की आश लिए पहुंच जाते हैं और अपनी झोली, खाली करवा के, लुट पिट कर, पंडे, पुजारियों की झोली जरुर भरके चले आते हैं.

नमूना-3-जब 85% के घर बच्चा पैदा होते ही,उसकी जन्म कुंडली बनवाना, समय तिथि के आधार पर उसकी राशि बताना, और उसी के आधार पर बच्चे के भविष्य तय होने का झूठ बताकर धन ऐंठना, किसी बच्चे को मूल नक्षत्र में पैदा होने पर, या किसी बड़ी अनहोनी का स्वांग फैलाकर उससे बचाव के नाम पर पूजा पाठ कराकर धन ऐंठना आदि. हमने तो कभी देखा है की कुछ बच्चों को मांगलिक बता देना जो बाद में विवाह आदि में बड़ी अड़चन बनता है हालांकि उसका भी उपाय ब्राह्मणों के पास होता है क्योंकि उन्हें पता रहता है कि वास्तव में वह उनके ही द्वारा पैदा की गई कृतिम समस्या है. अत: खूब अधिक धन लेकर वो इसे ठीक करने का ढोंग भी कर देते हैं.

नमूना -4-ब्राह्मण के सत्ताधारी होने के कारण ही वो उसके द्वारा लिखे काल्पनिक ग्रंथों की कहानियों रामायण महाभारत आदि को सच्चे इतिहास के रूप में शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल करके बच्चों के दिमाग में भी योजनाबद्ध तरीके से झूठ रोपता है. उसे पता है कि न तो कभी रामायण काल था न महाभारत काल और न ही सतयुग द्वापर त्रेता न राम आदि कभी पैदा हुए न हनुमान न कृष्ण न शंकर सब के सब लोगों को मूर्ख व लालची बनाने के लिए मनगढंत और काल्पनिक हैं. लेकिन इन्हें सच्चे इतिहास के रूप में बहुजन के दिमाग में निरंतर संचार माध्यमों द्वारा पच्चासी फीसदी जनता के दिमाग में ठूंसते रहते है क्योंकि ऐसा करना ब्राह्मण शाही के लिए जरूरी है इसलिए वह फिल्मों व सीरियलों तथा विभिन्न माध्यमों द्वारा उन कपोल कथाओं का निरन्तर प्रचार-प्रसार करके अंधविश्वासी बनाते रहते हैं.यहाँ आपको एक बात बताना चाहूँगा की ------

“सुप्रीम कोर्ट मुकदमा नंबर –291/1971,दिनांक 16 सितम्बर 1976 के निर्णय अनुसार रामायण एक काल्पनिक ग्रन्थ है.(सरकार वनाम ललई सिंह यादव निवासी झीझक,कानपुर देहात,उत्तर प्रदेश.इण्डिया.”

नमूना -5- ब्राह्मण को पता है कि न कभी समुद्र मंथन हुआ था और न चौदह रत्न निकले थे लेकिन कोरी गप्प कथाओं में ब्राह्मणों ने समुद्र से निर्जीव तो निर्जीव कामधेनु गाय , ऐरावत हाथी ,लक्ष्मी और धन्वतंरि वैद्य भी निकला हुआ बता दिया और सिर्फ बताया ही नहीं बल्कि लोगों से मनवा भी लिया.अमृत जैसा कोई पेय होता ही नहीं जिसे पीकर कोई अमर हो जाय लेकिन गप्पियों ने उसे भी समुद्र से निकला हुआ बता दिया.

नमूना -6-अमृत कुंभ से छलक कर जहां जहां गिरा (प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक) वहां ब्राह्मणों के स्थाई रोजगार के लिए कुंभ मेला भी सरकारी धन से लगवा दिया जिसमें लाखों बहुजन आज भी पुण्य लाभ के लिए दूर दूर से चलकर शामिल होते हैं.

नमूना-7- ब्राह्मणों को पता है कि वह सत्यनारायण कथा के नाम पर उनके ही द्वारा गढ़ी गई झूटी ऐसी पांच कहानियां हैं जिन्हें सुनाकर वो इनसे धन ऐंठते हैं.

अब मै आपसे कहना चाहूँगा की कब तक आप नहीं जागेगे,जब आपकी सब कुछ लुट जायेगा.अब तो जागो.अपनी अस्तित्व बचाओ आपका अस्तित्व खतरें में है .हमारे आपके द्वारा इन मंदिरों या पाखंड के नाम पर जो धन जाता है वह धन ऐसे जगह खर्च होता हैं जहाँ हम आप कैसे गुलाम बने उसका फार्मूला तैयार होता है यानि की आप को गुलाम बनाने की रुपरेखा यही तय होती है. और आप द्वारा दिया गया धन इसी मद में खर्च होता है.

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