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जिज्ञासा

मायावती प्रश्न चिन्ह ? जानिए रहस्य !

बहुजन का मायावती से सवाल

सवाल-1- मायावती उसी कालाराम मन्दिर के महंत के पोते महंत सुधीर दास को लोकसभा चुनाव में बसपा से टिकट देकर चुनाव लड़ाया.जो बाबा साहब को जिसका बाबा लाठियों से मारकर घायल किया था.क्या लड़ाना उचित था ? घटना यह थी की भारत में अछूत हिन्दुओं (हिन्दू दलितों) को छोड़ कर बाकी सभी जातियों को जन्म से ही नासिक के कालाराम मन्दिर में प्रवेश करने का अधिकार था. इस भेद-भाव के चलते  2 मार्च 1930 को डा.भीमराव आम्बेडकर ने अछूतों को मन्दिर में प्रवेश कराने के लिए एक आन्दोलन  नासिक के कालाराम मन्दिर में किया. और इस आन्दोलन में लगभग 15 हजार दलित शामिल हुए थे. जिनमे महिलाओं की संख्या भारी थी.और इस सत्याग्रह में भाग लेने वाले ज्यादातर महार, और चमार समुदाय के थे. यह हिंसा मुक्त आन्दोलन (सत्याग्रह ) 5 वर्ष 11 महिने एवं 7 दिन तक चला. महाराष्ट्र में  नासिक के कालाराम मन्दिर में प्रवेश को लेकर इन  सत्याग्रह और संघर्ष  करने वाले लोगों का यह कहना था कि----------

"यदि ईश्वर सबके हैं तो उनके मन्दिर में कुछ ही लोगों को प्रवेश क्यों दिया जाता है."

इस आन्दोलन में अम्बेडकर के साथ दादासाहब,सहस्त्र बुद्धे,देवराव नाईक ,गायकवाड, बालासाहब खरे, स्वामी आनन्द आदि मौजूद थे. इस सत्याग्रह में शामिल होने के लिए पुरे महाराष्ट तथा आस-पास लोग नाशिक शहर में आये थे. 2 मार्च 1930 को बाबा साहब की अगुवाई में यह निर्णय लिया गया की मंदिर में प्रवेश करने के लिए अथवा इस आन्दोलन में अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा. इस बात की सूचना सभी आन्दोलन- कारियों को दे दी गयी .अगले दिन 3 मार्च 1930 को बाबा साहब के निर्देशानुसार सत्याग्रहीओं की चार टुकड़ियाँ बनाई गई. क्योंकि मंदिर के परिसर में कुल 4 दरवाजे थे इस लिए इन टुकड़ियों के प्रवेश करने की अलग-अलग रहने के लिए कहा गया था. मंदिर के इन दरवाजों पर पुलिस की बड़ी मुस्तैदी से तैनात की व्यवस्था की गयी थी ताकि एक भी अछूत दलित मंदिर के अन्दर प्रवेश न कर सके .इसके बाद शहर के सवर्ण हिन्दुओं ने इन सत्याग्रहीओं पर हमला कर दिया, इन पर पत्थर बरसाए गये तथा लाठीओं से लोगो की पिटा गया.

“प्रवेश करते समय महंत रामदास ने बाबा साहब के सिर में जोर की लाठी मारी जिससे बाबा साहब बेहोश होकर वहीं गिर गये.”

गौर तलब है की मायावती ने उसी कालाराम मन्दिर के महंत के पोते महंत सुधीर दास को लोकसभा चुनाव में बसपा से टिकट देकर चुनाव लड़ाया. यह बहुजन समाज और बाबा साहब डा.आंबेडकर तथा मान्यवर काशीराम के मूवमेंट को आगे बढ़ाने के लिए क्या सही निर्णय था या गलत, विचार करें ? क्या मायावती द्वारा इस तरीके से किये गये कृत से बाबा साहब का घोर अपमान नहीं हुआ !

प्रश्न-2-विहार राज्य के बक्सर की बात करते है चुनाव के दौरान काशीराम साहब मंच से जनसभा संबोधित कर रहे थे तो वहां के स्थानीय कुछ लोग और एक हृदय नाथ यादव नाम का व्यक्ति ने कांशीराम साहब को मंच पर ही जूता मारकर अपमानित किया था. कांशीराम साहब के मरने के बाद उसी हृदय नाथ यादव को मायावती जी ने बसपा से विधान सभा का टिकट दिया था. अब प्रश्न उठता है की यह मिशन है या सियासत फ़िलहाल यह मायावती द्वारा किया गया यह कृत कांशीराम साहब का घोर अपमान हुआ.

सवाल-3-लखनऊ में बीच चौराहे पर लगी पेरियार रामास्वामी  नायकर साहब की प्रतिमा को मायावती जी ने क्यों हटवाया ? क्या यह कृत मिशन है या पेरियार, फुले या साहू जी का अपमान ?

सवाल-4-जिस अधिनियम में संशोधन/बदलाव करने की शक्ति केवल केन्द्र सरकार को है उस अनुसूचित जाति/ जनजाति अधिनियम में सन् 2002और 2007में दो बार शासनादेश जारी कर कमजोर करने का काम क्यों किया क्या यह बहुजन के हित में था ? हमारे पवित्र संविधान में आरक्षण का आधार जाति है, क्या मायावती आर्थिक आधार पर आरक्षण की वकालत करके हमारे हक अधिकारों को खत्म कराने की साजिश नहीं किया हैं?

सवाल-5-कांशीराम साहब परिवार वाद के शख्त विरोधी थे, और ठीक उल्ट मायावती ने अपने भाई आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर कांशीराम साहब की नीतियों पर कुठारा घात किया. और समस्त बहुजन समाज की सोच पर विराम लगाया .क्या यह मायावती की सोंच सही है ?

सवाल -6-मायावती व बसपा पार्टी बड़े गर्व से कहते हैं कि हमारी बहन मायावती जी ने राजा भैया जैसे गुंडे को ठिकाने लगा दिया तो बताइए मायावती स्वयं अपने ऊपर हुए घटना जिसमे किसी को साक्ष्य देने की जरुरत नहीं थी उस लखनऊ गेस्ट हाउस कांड जिसे आप अपने ऊपर जानलेवा हमला करार देते हुए अनेकों बार भाषण देती हैं. और आपने खुद हमला करने वाले लोगों के खिलाफ नामदर्ज रिपोर्ट ( उमाकांत यादव, रमाकांत यादव) हजरतगंज कोतवाली में की थी. अब सवाल उठता है की उसके बाद 1 बार नहीं आप 4 बार  इस बड़े सूबे की मुख्यमंत्री बनी आपने इनको सजा क्यों नहीं दिलवाई.बल्कि आपने उमाकांत यादव को सन् 2004 में लोकसभा चुनाव में टिकट देकर और लोकसभा में भेजकर पुरस्कृत भी किया. और इनके भाई रमाकांत यादव को तो भी विधान सभा में टिकट देकर भी पुरस्कृत किया आखिर क्यों ? बहुजन का सवाल उठाना यहाँ लाजमी होगा, की कहीं गेस्ट हाउस कांड आपकी साजिश तो नहीं थी ?

इन अहम सवालों ने मायावती को कटघरे में रखता है.दूसरा आज बसपा पार्टी का जो हकीकत स्थिति है वह बेहद ख़राब है. इसके पीछे कारण है,बाबा साहब और मान्यवर काशीराम के जो मिशन थे उस मिशन से मायावती विल्कुल अपने को अलग थलग कर लिया है जिसका परिणाम आज बसपा स्वयं झेल रही है

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