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खनन की काली खान

झारखंड-छत्तीसगढ़ और बुंदेलखंड में अवैध खनन से कुबेरपति होते अफसर

" बुंदेलखंड के महोबा में वर्ष 2020 को तैनात तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मणिलाल पाटीदार को भ्रस्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इन पर महोबा के कबरई निवासी स्टोन क्रेशर व विस्फोटक व्यापारी मृतक इंद्रकांत त्रिपाठी की आत्महत्या का मुकदमा धारा 306 में दर्ज हुआ था। इधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 1.0 सरकार ने निलंबित एसपी के आय से अधिक संपत्ति की जांच भी विजलेंस टीम को सौंप दी थी। " 


उत्तरप्रदेश सरकार ने महोबा के तत्कालीन भगोड़े करार दिए गए निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार पर एक और मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की है। खबर मुताबिक विजिलेंस टीम को महोबा में इनके कार्यकाल पर भ्रस्टाचार के पर्याप्त सबूत मिले हैं। विजिलेंस आय से अधिक संपत्ति की जांच भी कर रही है लेकिन निलंबित एसपी के फरारी काटने के चलते उनके बयान दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। उधर शासन ने केंद्र सरकार को इनकी बर्खास्त करने की सिफारिश रिपोर्ट भी प्रेषित की है जिस पर अमल होना बांकी है। एडीजी प्रयागराज पहले ही इनकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपया इनाम घोषित कर चुके हैं बावजूद इसके 2 साल से निलंबित एसपी मणिलाल पाटीदार की खोजबीन नहीं हो सकी है। जाहिर है सिस्टम में गहरी पकड़ रखने वाले निलंबित एसपी के नेटवर्क बेहद मजबूत है। काबिलेगौर है कि खनन कारोबार में काली कमाई की खान चौतरफा व्याप्त है। यह बुंदेलखंड का इलाका हो या छत्तीसगढ़ अथवा झारखंड। छत्तीसगढ़ में हसदेव के जंगलों में गौतम अडानी को कोयला उत्खनन के लीज पट्टे मिलने से आहत आदिवासियों का आंदोलन चल रहा है। यहां आदिवासी जंगलों के कटान का विरोध कर रहे हैं। फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने भी इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है लेकिन यह थमता नहीं दिख रहा है। 

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झारखंड में खनन सचिव पूजा सिंघल का दबदबा - 


बुंदेलखंड में यूपी व एमपी बेल्ट पर खनिज अधिकारी जैसे अपनी हनक रखतें है। वहीं जिलों में तैनात डीएम की मर्जी बिना अवैध खनन सम्भव नहीं होता हैं यही कुछ झारखंड में देखने को मिलता है। हाल ही में झारखंड के रांची शहर में आईएएस व खनन उद्योग सचिव पूजा सिंघल पर प्रवर्तन निदेशालय / ईडी की छापेमारी में 25 करोड़ रुपये की चल- अचल संपति मिलने से खनन में काली कमाई की खान का पर्दाफाश हुआ है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने टिवीटर हैंडिल पर झारखंड के मुख्यमंत्री की खास आईएएस पूजा सिंघल पर गम्भीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के बेटों व रिश्तेदारों को कौड़ियों के भाव मे खदानें देने की बात कही है। एक हिंदी दैनिक अखबार में 7 मई को प्रकाशित रिपोर्ट में इस बात पर साफ तौर पर लिखते हुए ईडी की राडार पर रही पूजा सिंघल को कटघरे में खड़ा किया गया है। वहीं सोशल मीडिया में इस महिला आईएएस की हर राज्य सरकार में मुख्यमंत्री की कारखास बनकर काम करने की बातें चल रही है। गृहमंत्री अमित शाह के साथ इनका एक फ़ोटो भी खूब वायरल किया जा रहा है। कांग्रेसी इस मामलें में आरोप प्रत्यारोप करते नजर आते हैं। जबकि उनकी ही पार्टी की छत्तीसगढ़ राज्य सरकार में हसदेव के जंगलों का कोयला खनन के लिए उजाड़ हो रहा है। कांग्रेसियों की जुबान खामोश हैं। वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से एक सवाल नहीं कर सकतें हैं। झारखंड में जिस तर्ज पर यह ब्लैकमनी ईडी को आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों से मिली है उसने बुंदेलखंड के महोबा में वर्ष 2020 को तैनात निलंबित आईपीएस मणिलाल पाटीदार की याद दिला दी है। वहीं आज भी ऐसे खनिज अधिकारी चित्रकूट मंडल में तैनात हैं जिन पर विजिलेंस जांच चल रही है। महोबा के खनिज अधिकारी शैलेंद्र सिंह इस क्रम में नजर आते हैं। बुंदेलखंड से उनका गहरा रिश्ता तैनाती को लेकर रहा है। खनन कारोबार में सफेदपोश माननीयों के साथ ब्यूरोक्रेसी की सांठगांठ से इस पेशे में सिंडिकेट की घुसपैठ है। राज्यों में सरकार किसी भी दल की रहे लेकिन अवैध खनन रुकता नहीं हैं। कहीं नदियों तो कहीं पहाड़ो और कहीं सिल्का सैंड व जंगलों में उत्खनन के तार व्हाइट कॉलर लोगों से जुड़े हैं। यही कारण है झारखंड जैसी नजीर आईएएस पूजा सिंघल की बानगी में नजर आती है। 


यूपी के सोनभद्र में अवैध खनन पर कार्यवाही :-

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उत्तरप्रदेश के सोनभद्र में अवैध खनन की खबरें सामान्य बात हैं। आदिवासी बाहुल्य यह क्षेत्र लाल मौरम व पहाड़ों के लिए चर्चित हैं। हाल ही में डीएम रहे टीके शीबू को मुख्यमंत्री योगी ने अवैध खनन प्रश्रय देने में निलंबित किया है। इसी कड़ी में अवैध खनन, वसूली और ओवरलोडिंग परिवहन पर कार्यवाही चल रही है। शासन ने यहां खनिज मुहर्रिर को निलंबित किया है। भूतत्व व खनिकर्म खान निदेशक रौशन जैकब ने बीते 9 अप्रैल को वरिष्ठ अधिकारी जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, खान अधिकारी विकास सिंह परमार,खान निरीक्षक सुखेन्द्र सिंह को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय से संबद्ध किया है। वहीं खनिज मुहर्रिर कुंदन कुमार, खनिज लिपिक कमला शंकर उपाध्याय पर निलंबन की कार्यवाही हुई है। निदेशक रौशन जैकब की तरफ से जारी पत्र में कहा गया कि दोनों विरुद्ध खनिज बैरियर से परिवहन कर रहे ट्रकों से रोजाना लाखों रुपया अवैध वसूली करने और सहयोगी की मिलीभगत से वसूली कराकर ओवरलोडिंग वाहनों को छोड़ने का अपकृत्य कार्य किया जाना पाया गया है। इन चार अफसरों पर इसकी जानकारी के बावजूद कार्यवाही नहीं करने की बात कही गई है। कुल मिलाकर खनन व्यवसाय में सियासत,ब्यूरोक्रेट्स और सिंडिकेट तीनो की सूझबूझ, सांठगांठ की बदौलत बुंदेलखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़ में अवैध खनन की जड़े मजबूत है। यदि ऐसा न होता तो बाँदा व चित्रकूट में लगातार नदियों का प्रतिबंधित हैवी पोकलैंड मशीनों से उत्खनन कैसे मुनासिब हो रहा होता ? यह समाजवादी और बसपा में सरकार भी था वहीं आज भी जस का तस चल रहा है। करोड़ो रूपये की सल्तनत जिस धंधे से बनती हो उसको कौन बन्द करना चाहेगा जब तक प्राकृतिक संसाधनों का अस्तित्व अवशेष है। 

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